नई दिल्ली: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर गहरा गया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर डोनाल्ड ट्रंप ने नया दावा करते हुए इसे अमेरिकी इलाका बताया और मानचित्र साझा किया. दूसरी ओर ईरान ने स्पष्ट कहा कि वॉशिंगटन अपना रुख नहीं बदलता तो समुद्री मार्ग खोलने पर सहमति नहीं बनेगी. इसी बीच नए अमेरिकी प्रतिबंधों की तैयारी से क्षेत्रीय कूटनीतिक टकराव और बढ़ने की आशंका लगातार जताई जा रही है जिससे वैश्विक तेल व्यापार.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सामाजिक मंच पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का मानचित्र साझा करते हुए फिर दावा किया कि यह अमेरिका का इलाका बनने जा रहा है. इससे पहले भी वह कई बार इसी तरह का बयान दे चुके हैं. ट्रंप का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब मध्य पूर्व में समुद्री सुरक्षा और तेल आपूर्ति को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है.
🔴President Trump just posted a map labeling the Strait of Hormuz as “NEW U.S. Territory.” The critical waterway is clearly circled and claimed. This follows his repeated statements that America now controls the Strait. Iran’s ability to threaten global oil shipping is being… pic.twitter.com/4TbQoFMNWC
— Commentary Donald J. Trump Posts From Truth Social (@TrumpDailyPosts) August 22, 2026
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने अमेरिका के दावे पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उनका कहना है कि वॉशिंगटन और होर्मुज के बीच हजारों मील की दूरी है, इसलिए मालिकाना हक का दावा वास्तविकता से दूर है. उन्होंने पड़ोसी देशों से भी अमेरिकी आर्थिक अभियान का समर्थन नहीं करने की अपील की.
वॉशिंगटन ईरान पर अब तक के सबसे कठोर आर्थिक प्रतिबंध लागू करने की तैयारी में है. प्रस्तावित कदमों का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और एशियाई व्यापार पर भी पड़ सकता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है. फारस की खाड़ी से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचता है. इसलिए यहां पैदा होने वाला कोई भी सैन्य या राजनीतिक तनाव सीधे ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार को प्रभावित करता है.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंधों को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है. प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका अपनी सीमाओं से बाहर आर्थिक अधिकार थोपने की कोशिश कर रहा है. वहीं ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सम्मानजनक कूटनीतिक समाधान की वकालत करते हुए संकेत दिया कि बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है.