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ईरान से युद्ध ट्रंप के लिए बना गले की फांस! अमेरिका में ईंधन की कीमतों ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, महंगाई से मचा हाहाकार

ईरान के साथ बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग रुकावटों के कारण अमेरिका में गैसोलीन और डीजल की कीमतें 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं. वैश्विक तेल संकट का असर अब सीधे अमेरिकी नागरिकों की जेब पर पड़ रहा है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वर्तमान में अपनी ही बिछाई गई बिसात में उलझते नजर आ रहे हैं. ईरान के साथ बढ़ता सैन्य टकराव अब न केवल सामरिक मोर्चे पर अमेरिका के लिए चुनौती बना हुआ है, बल्कि इसका सीधा और कड़ा प्रहार अब अमेरिकी नागरिकों की जेब पर भी शुरू हो गया है. ईरान युद्ध की शुरुआत के साथ ही अमेरिका में ईंधन की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है, जिससे आम जनता के बीच भारी नाराजगी और चिंता की लहर दौड़ गई है.

इस संकट की सबसे बड़ी वजह ईरान द्वारा नियंत्रित 'होर्मुज जलडमरूमध्य' में पैदा हुई रुकावट है. दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग में व्यवधान आने से दुनिया भर में तेल और गैस का भारी संकट पैदा हो गया है. इसका सबसे बुरा असर अमेरिका में देखने को मिल रहा है, जहां महंगाई ने पिछले चार वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है.

पेट्रोल पंपों पर कीमतों ने लगाई आग 

ताजा आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में रेगुलर गैसोलीन की राष्ट्रीय औसत कीमत अब 4.02 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है. गौर करने वाली बात यह है कि युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में यह कीमत एक डॉलर प्रति गैलन से भी ज्यादा बढ़ चुकी है. अमेरिका के कुछ राज्यों में यह औसत और भी अधिक है, जिससे वाहन चलाना अब एक महंगा सौदा बन चुका है. डीजल के दामों की बात करें तो यह औसतन 5.45 डॉलर प्रति गैलन के स्तर पर आ गया है, जबकि युद्ध से पहले यह लगभग 3.76 डॉलर प्रति गैलन के आसपास स्थिर था.


कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों का दबाव 

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा यह संघर्ष अब पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुका है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल 114 से 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे दायरे में बनी हुई हैं. चूंकि कच्चा तेल पेट्रोल का प्राथमिक घटक है, इसलिए इसकी कीमतों में होने वाली हर हलचल का सीधा असर रिटेल फ्यूल प्राइस पर पड़ रहा है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह युद्ध और लंबा खिंचता है, तो ईंधन की कीमतें और भी भयावह स्तर तक जा सकती हैं. अमेरिकी चालकों के लिए यह स्थिति 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद की सबसे बड़ी आर्थिक मार बनकर उभरी है.