नई दिल्ली: अमेरिका इन दिनों भीषण सर्दी और बर्फीले तूफान की चपेट में है. टेक्सास से लेकर न्यू इंग्लैंड तक फैले इस शीतकालीन तूफान ने हालात को खतरनाक बना दिया है. सड़कों पर जमी बर्फ, तेज हवाएं और माइनस में पहुंचता तापमान आम लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है. प्रशासन लगातार चेतावनी जारी कर रहा है, लेकिन मौसम की मार थमने का नाम नहीं ले रही.
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, अब तक इस तूफान से जुड़ी कम से कम सात मौतों की पुष्टि हुई है. लुइसियाना में दो लोगों की मौत हाइपोथर्मिया से हुई, जबकि न्यूयॉर्क शहर में ठंड के दौरान बाहर मिले पांच लोगों की मौत की जांच चल रही है. हालात इतने खराब हैं कि कई इलाकों में आपात सेवाओं को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
अमेरिका इस समय कड़ाके की ठंड और बर्फीले तूफान के सबसे खतरनाक दौर से गुजर रहा है. टेक्सास से लेकर न्यू इंग्लैंड तक फैले इस तूफान ने रोजमर्रा की जिंदगी को थाम दिया है. सड़कें बर्फ से ढक गई हैं, स्कूल बंद हैं और प्रशासन लगातार लोगों को घरों में रहने की सलाह दे रहा है. मौसम की गंभीरता को देखते हुए कई राज्यों में आपातकाल घोषित किया गया है.
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस तूफान से जुड़ी कम से कम सात मौतें सामने आई हैं. लुइसियाना में दो लोगों की मौत हाइपोथर्मिया के कारण हुई है. वहीं न्यूयॉर्क शहर में ठंड के दौरान बाहर पाए गए पांच लोगों की मौत की जांच की जा रही है. प्रशासन का कहना है कि अत्यधिक ठंड में बाहर रहना जानलेवा साबित हो सकता है.
भारी बर्फबारी और तेज हवाओं के कारण बिजली आपूर्ति पर भी बड़ा असर पड़ा है. रविवार दोपहर तक करीब नौ लाख घरों में बिजली नहीं थी. टेनेसी और मिसिसिपी सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल हैं. बिजली गुल होने से हीटिंग सिस्टम ठप पड़ गए हैं, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है.
तूफान की वजह से देशभर में 10,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गईं और लगभग 20,000 उड़ानों में देरी हुई. फिलाडेल्फिया, वाशिंगटन, न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी के हवाई अड्डों पर सबसे ज्यादा असर देखा गया. सड़कों पर जमी बर्फ के कारण वाहन चलाना भी बेहद खतरनाक हो गया है.
अर्कांसस से न्यू इंग्लैंड तक करीब 1,300 मील के क्षेत्र में 30 सेंटीमीटर से ज्यादा बर्फ गिर चुकी है. कुछ जगहों पर 60 सेंटीमीटर तक बर्फबारी का अनुमान जताया गया है. मिसिसिपी में इसे 1994 के बाद की सबसे भीषण बर्फबारी बताया जा रहा है, जिसके चलते रिकॉर्ड स्तर पर बर्फ पिघलाने वाले रसायनों का इस्तेमाल किया गया.
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस चरम मौसम की मुख्य वजह ध्रुवीय भंवर का कमजोर होना है. इसके चलते आर्कटिक की ठंडी हवा तेजी से दक्षिण की ओर फैल गई. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि बर्फ धीरे-धीरे पिघलेगी और खतरनाक हालात कई दिनों तक बने रह सकते हैं. लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है.