Canada Action Against Terrorism: कनाडा ने आतंक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान समर्थित खालिस्तानी आतंकवादियों को नो-फ्लाई सूची में डाल दिया है. कनाडा सरकार ने खुफिया जानकारी के आधार पर पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों पर प्रतिबंध लगाते हुए नो फ्लाई लिस्ट में डाल दिया है. नो फ्लाई लिस्ट का मतलब व्याधान पैदा करने वाले लोगों की पहचान करना और उन्हें अस्थायी रूप से फ्लाइट लेने से रोकना है.
सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि परुपकर दुल्लई उर्फ पैरी दुल्लई, भगत सिंह बराड़ और सतिंदरपाल गिल को कनाडा सरकार ने नो-फ्लाई लिस्ट में डाल दिया है. कनाडा की अदालत ने गुरुवार को सुरक्षा मंत्री की ओर से दी गई गोपनीय जानकारी के आधार पर जस्टिन ट्रूडो सरकार के फैसले को बरकरार रखा है. अपनी दलील में, कनाडा सरकार ने कहा कि ये मानने के लिए उचित आधार है कि ये व्यक्ति (परुपकर दुल्लई उर्फ पैरी दुल्लई, भगत सिंह बराड़ और सतिंदरपाल गिल) आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं.
कनाडा सरकार ने अपनी दलील में ये भी कहा कि लिस्ट में इन आतंकियों का नाम डालना उचित है. साथ ही जानकारी दी गई कि तीनों आतंकियों की अदालती चुनौती को खारिज कर दिया गया है. पैरी दुल्लई को एनडीपी नेता जगमीत सिंह का करीबी सहयोगी बताया जाता है. वह सरे से 'चैनल पंजाबी' और चंडीगढ़ से 'ग्लोबल टीवी' नाम का चैनल चलाता है.
इस बीच, बताया जा रहा है कि सतिंदरपाल गिल ने पाकिस्तान में कुछ समय बिताया है, जबकि भगत सिंह बराड़ पाकिस्तान स्थित खालिस्तानी अलगाववादी लखबीर सिंह रोडे का बेटा है. कनाडा सरकार का ये फैसला साबित करता है कि खालिस्तान आतंकवाद ग्लोबल सिक्योरिटी के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है.
घटनाक्रम से परिचित सरकारी अधिकारियों ने CNN-News18 को बताया कि ये कोई नई बात नहीं है. वे खुलेआम खालिस्तानी समूहों का समर्थन करते हैं. ड्रग मनी और हथियारों की तस्करी से होने वाली आय का इस्तेमाल भारत पर हमला करने और भारतीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए किया जाता है.
ये घटना कनाडा की ओर से संसद में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप निज्जर को सम्मानित करने के कुछ दिनों बाद सामने आई है. कनाडा की संसद ने मंगलवार को हाउस ऑफ कॉमन्स में निज्जर की मौत की एक साल की सालगिरह पर मौन रखकर श्रद्धांजलि दी.
निज्जर को पिछले साल 18 जून को कनाडा के सरे में एक पार्किंग स्थल के बाहर गोली मार दी गई थी. भारत सरकार ने उसे गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत 'नामित आतंकवादियों' की सूची में डाल दिया था. निज्जर बब्बर खालसा से जुड़ा था और भारत में कई आतंकी गतिविधियों में शामिल था.