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BLA की मजीद ब्रिगेड से क्यों डरती है पाकिस्तानी सेना? क्वेटा ट्रेन हमले के बाद फिर चर्चा में, जानिए नामकरण के पीछे की कहानी

बलूचिस्तान में ट्रेन हमले की जिम्मेदारी लेने वाली BLA की मजीद ब्रिगेड एक बार फिर सुर्खियों में है. जानिए कब बनी यह आत्मघाती यूनिट, क्या है इसकी ताकत और क्यों पाकिस्तानी सेना भी इससे खौफ खाती है.

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Dhiraj Kumar Dhillon

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में ट्रेन हमले की जिम्मेदारी लेने वाली बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की मजीद ब्रिगेड इतनी खतरनाक है कि उसके पाकिस्तानी आर्मी भी पानी भरती है. क्वेटा में ट्रेन पर हुए हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बलूचिस्तानी लड़ाके शां‌त नहीं बैठने वाले. बलूचिस्तान में विद्रोह की आग लगातार भड़क रही है. बात केवल इतनी ही नहीं है, इस हमले ने पाकिस्तान की सिक्योरिटी सिस्टम की भी पोल खोलकर रख दी है. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है.

फरवरी में एक साथ कई शहरों पर किए थे हमले

बलूचिस्तानी लड़ाकों ने फरवरी 2026 में एक साथ कई शहरों पर हमले कर पाकिस्तान के पूरे सिक्योरिटी सिस्टम को हिलाकर रख दिया था. लड़ाकों ने सेना और पुलिस की चौक‌िंयों पर कब्जा जमा लिया था. स्थिति यह हो गई थी कि कई जगहों पर पाकिस्तानी सेना को पीछे हटना पड़ गया था. उस समय बीएलए की तीन यूनिटों- मजीद ब्रिगेड, फतेह स्क्वाड और एसटीओएस ने एक संयुक्त ऑपरेशन को अंजाम दिया था, लेकिन उस समय भी सबसे ज्यादा तबाही मजीद ब्रिगेड ने ही मचाई थी. बता दें कि मजीद ब्रिगेड को आत्मघाती हमलों में महारथ हासिल है. इस ब्रिगेड भी महिलाएं भी शामिल हैं.

कब बनी मजीद ब्रिगेड, क्या है खासियत

मजीद ब्रिगेड 2011 में बनी थी. बीएलए के पूर्व नेता असलम अचू ने इसका गठन किया था। इसके नामकरण के पीछे भी एक कहानी है. उन्होंने दो भाईयों मजीद लंगोव सीनियर और मजीद लंगोव जूनियर के नाम पर मजीद ब्रिगेड का नामकरण किया था. मजीद लंगोव सीनियर जुल्फिकार अली भुट्टों पर हमले की कोशिश में 1974 में मारा गया था. जबकि छोटा भाई यानी मजीद लंगोव जूनियर सुरक्षा बलों के एक ऑपरेशन के दौरान 2010 में मारा गया था. इन्हीं दोनों भाईयों की याद में असलम अचू ने मजीद ब्रिगेड का गठन कर दिया ताकि उनकी शहादत को बीएलए कभी भुला न पाए.

यूं ही खौफ नहीं खाती पाकिस्तानी सेना

पाकिस्तानी सेना इस ‌ब्रिगेड से यूं ही खौफ नहीं खाती. यह बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की स्पेशल फोर्स यूनिट है- मजीद ब्रिगेड. इसका टारगेटेड आत्मघाती हमला अचूक माना जाता है. करांची में 2020 में बम धमाका और फिर 2024 में करांची एयरपोर्ट पर आत्मघाती हमला कर मजीद ब्रिगेड अपना लोहा मनवा चुकी है. हेरोफ 2.0 में मजीद ब्रिगेड की हला बलोच और आसिफा मेंगल, जो महिला फिदायीन थीं, ग्वादर और नुश्की में आईएसआई के सीटीडी के ठिकानों पर हमले किए थे. इन हमलों में 18 लड़ाके मारे गए थे और उनमें से 11 मजीद ब्रिगेड के फिदायीन थे. अमेरिका ने 2025 में बीएलए के साथ ही मजीद ब्रिगेड को भी फॉरेन टेरेरिस्ट ऑर्गेनेशन करार दिया था.

रविवार को हुए हमले की भी ली जिम्मेदारी

बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने कहा, 'आज सुबह, बलूच लिबरेशन आर्मी की फिदायी (आत्म-बलिदान करने वाली) इकाई, मजीद ब्रिगेड ने क्वेटा कैंट से कब्जा करने वाली सेना के जवानों को ले जा रही एक ट्रेन को एक सुनियोजित फिदायी हमले में निशाना बनाया. बलूच लिबरेशन आर्मी इस ऑपरेशन की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करती है. इस ऑपरेशन से संबंधित विस्तृत जानकारी, साथ ही हमले के परिणामस्वरूप दुश्मन को हुए भौतिक और मानवीय नुकसानों के बारे में जल्द ही मीडिया को एक आधिकारिक बयान में जानकारी दी जाएगी.'