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'गिरोह में 1000 शूटर...टैक्स देना ही होगा', बिश्नोई गैंग की पुलिस को सीधी धमकी

कनाडाई पुलिस ने बिश्नोई गैंग को लेकर कई खुलासे किए हैं. पुलिस के अनुसार गैंग ने 1000 शूटर होने का दावा किया है.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: लॉरेंस बिश्नोई गैंग का खौफ लगातार बढ़ता जा रहा है. आए दिन गैंग के गुर्गे लोगों को वॉट्सएप कॉल करके धमकियां दे रहे हैं और रंगदारी मान रहे हैं. कनाडा की पुलिस ने भी देश में बढ़ते बिश्नोई गैंग के नेटवर्क को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. जांचकर्ताओं के अनुसार पिछले साल एबॉट्सफोर्ड पुलिस स्टेशन को एक धमकी भरा खत भेजा गया था. इस खत में गैंग ने दावा किया था कि उसके लिए 1000 से ज्यादा शूटर काम कर रहे हैं. संदेश में यह चेतावनी भी दी गई थी कि हर कारोबारी को 'टैक्स' देना होगा जिसे पुलिस जबरन वसूली की रकम मान रही है.

अधिकारियों ने बताया कि जिन व्यापारियों ने पैसे देने से इनकार किया उनके घरों और दुकानों पर गोलियां चलाई गईं. धमकियां मुख्य रूप से व्हाट्सएप कॉल के जरिए दी जाती थीं जहां गैंग के सदस्य पैसे मांगते थे और पीड़ितों के बीच खौफ पैदा करने की कोशिश करते थे. पुलिस रिपोर्टों से पता चलता है कि पिछले कुछ महीनों में दक्षिण एशियाई मूल के कारोबारी इनके मुख्य निशाने पर रहे हैं.

भारतीय छात्रों को गैंग में किया गया शामिल

जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि कनाडा में रह रहे कुछ भारतीय छात्रों और अस्थायी वर्क परमिट धारकों को कथित तौर पर इस गैंग में भर्ती किया गया था. जांचकर्ताओं का मानना है कि इन युवाओं को गोलीबारी और डराने-धमकाने जैसी हिंसक वारदातों में शामिल होने के लिए मामूली रकम का लालच दिया जाता था.

जबरन वसूली के लिए की जाने वाली कॉल्स में पीड़ितों को डराने के लिए लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ के नामों का अक्सर इस्तेमाल किया जाता था. हालांकि पुलिस ने कहा कि कई मामलों में इन वारदातों को जोरा सिद्धू नाम का एक अन्य गैंग का सदस्य संभाल रहा था.

गैंग ने बदला काम करने का ढंग

पुलिस ने यह भी ध्यान दिया कि गैंग ने समय के साथ अपने तौर-तरीके बदल लिए हैं. पहले जहां अपराधी मुख्य रूप से फोन पर धमकी देकर पैसे मांगते थे वहीं अब सीधे घरों और व्यवसायों पर गोलीबारी करने की घटनाएं बढ़ गई हैं. अधिकारियों ने बताया कि कई अन्य छोटे-मोटे गैंग भी लोगों को डराने और अवैध रूप से पैसे वसूलने के लिए बिश्नोई गैंग के नाम का इस्तेमाल करने लगे हैं.

जांचकर्ताओं के अनुसार यह नेटवर्क ब्रिटिश कोलंबिया, अल्बर्टा, ओंटारियो और मैनिटोबा सहित कनाडा के कई प्रांतों में फैल चुका है. पुलिस इस बात से हैरान थी कि अवैध हथियार इतनी तेजी से एक प्रांत से दूसरे प्रांत में पहुंचाए जा रहे हैं. एक मामले में तो एक ही बंदूक का इस्तेमाल महज 24 घंटे के भीतर दो अलग-अलग प्रांतों में होने की बात सामने आई है.

कनाडाई सरकार ने पिछले साल आधिकारिक तौर पर बिश्नोई गैंग को एक आतंकवादी संगठन के रूप में लिस्टेड किया था. मई 2026 तक अधिकारी जबरन वसूली और गैंग की गतिविधियों से जुड़े 446 मामलों की जांच शुरू कर चुके थे. इस मामले में 118 लोगों के खिलाफ डिपोर्टेशन आदेश जारी किए गए हैं जबकि 55 लोगों को पहले ही कनाडा से बाहर निकाला जा चुका है.