मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल के लिए रोक दिया है. हालांकि डोनाल्ड ट्रंप के इस कूटनीति को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मानने से इनकार कर दिया है. नेतन्याहू ने सोमवार को ट्रंप से फोन पर बातचीत की और इसके बारे में उन्होंने खुद जानकारी दी.
इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि आज मैंने अपने दोस्त राष्ट्रपति ट्रंप से बात की, उनका का मानना है कि हम एक समझौते के जरिए युद्ध के लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं. एक ऐसा समझौता कर सकते हैं जो अहम हितों की रक्षा करेगा. हालांकि नेतन्याहू और ट्रंप एक बात पर सहमत नजर नहीं आ रहे हैं.
इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ईरान और लेबनान पर हमले जारी रखेंगे. उन्होंने कहा कि हम उनके मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु कार्यक्रम को तबाह कर रहे हैं और इससे हिज़्बुल्लाह को लगातार झटका मिल रहा है. नेतन्याहू ने दावा किया कि इस जंग में उन्होंने कुछ दिनों पहले दो और परमाणु वैज्ञानिकों को मार गिराया.
उन्होंने यह भी कहा कि हमारे हाथ अभी भी हमारी रक्षा के लिए मजबूत है और हम किसी भी हालात में अपने जरूरी हितों की रक्षा करेंगे. हालांकि दूसरी ओर ट्रंप का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत हुई है, दोनों पक्ष समझौते के अहम बिंदु पर सहमत हैं. इसी के साथ उन्होंने ईरान के पावर प्लांट पर हमले के आदेश को टालने के लिए कहा .
מוקדם יותר היום שוחחתי עם ידידנו הנשיא טראמפ.
— Benjamin Netanyahu - בנימין נתניהו (@netanyahu) March 23, 2026
הנשיא טראמפ מאמין שיש סיכוי למנף את ההישגים הכבירים שהשגנו עם צבא ארה"ב, כדי לממש את יעדי המלחמה בהסכם - הסכם שישמור על האינטרסים החיוניים שלנו.
במקביל, אנחנו ממשיכים לתקוף גם באיראן וגם בלבנון. אנחנו כותשים את תוכנית הטילים… pic.twitter.com/EHG9geofkl
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा जंग अपने चौथे हफ्ते में थे. इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी थी कि अगर 48 घंटे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला गया तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट पर हमला कर देगा. अमेरिका के इन धमकियों पर पलटवार करते हुए ईरान ने साफ कहा था कि वे इस जंग को जारी रखेगा और एक भी जहाज को उस रास्ते पार नहीं होने देगा. ट्रंप द्वारा दिया गया समय पूरा होने ही वाला था, इससे पहले ट्रंप ने युद्ध विराम का ऐलान कर दिया. हालांकि उनके इस घोषणा पर इजरायल अब भी सहमत नहीं है. लेकिन रिपोर्ट का मानना है कि शायद ट्रंप ने इस जंग के पीछे अमेरिका को हो रहे नुकसान का आकलन किया और कदम वापस ले लिए. हालांकि ईरान अभी भी मजबूती से खड़ा है.