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'रूस भागने का कोई इरादा नहीं था, देश को मुक्ति नहीं....', सीरिया से दुम दबाकर भागे बशर अल असद का सामने आया पहला बयान

असद ने अपने अतीत को याद करते हुए कहा कि उन्होंने लाख प्रस्तावों और प्रलोभनों के बावजूद अपने राष्ट्र के हितों से समझौता नहीं किया. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने सैनिकों के साथ अग्रिम मोर्चे पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी और युद्ध के सबसे काले वर्षों में भी अपने लोगों के साथ रहे.

Sagar Bhardwaj

जान बचाकर अपने परिवार के संग रूस भागे सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद का पद से हटाए जाने के बाद पहला बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि उनका कभी भी पद छोड़ने या दूसरे देश में शरण लेने का कोई इरादा नहीं था, वे आतंकवाद से लड़ने को तैयार थे. असद ने कहा कि यह नहीं कह सकते कि उनका देश मुक्त हो गया है बल्कि उनका देश आतंकवाद के हाथों में चला गया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि सीरिया के लोगों से उनका रिश्ता किसी भी स्थिति या परिस्थिति में अडिग है. 

संचार बाधित होने के कारण बयान जारी करने में हुई देरी
असद ने कहा कि संचार बाधित होने के कारण उन्हें बयान जारी करने में देरी हुई. असद ने आगे कहा कि वह अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए 8 दिसंबर की सुबह तक राजधानी दमिश्क में रुके थे. उन्होंने दावा किया कि उनका रूस आना किसी योजना के तहत नहीं था. जब मुझे 8 दिसंबर की शाम तक मुझे हालात बिल्कुल काबू से बाहर दिखे तो मैंने रूस से तत्काल निकासी की व्यवस्था के लिए कहा.

राष्ट्र के हितों से कभी समझौता नहीं किया
असद ने अपने अतीत को याद करते हुए कहा कि उन्होंने लाख प्रस्तावों और प्रलोभनों के बावजूद अपने राष्ट्र के हितों से समझौता नहीं किया. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने सैनिकों के साथ अग्रिम मोर्चे पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी और युद्ध के सबसे काले वर्षों में भी अपने लोगों के साथ रहे.

व्यक्तिगत लाभ के लिए कभी भी नहीं थी पद की इच्छा
असद ने कहा कि उन्होंने कभी भी व्यक्तिगत लाभ के लिए पद की तलाश नहीं की और हमेशा अपने लोगों की राज्य की रक्षा और उनके संस्थानों की रक्षा करने और अंतिम क्षण तक अपने फैसलों को कायम रखने की क्षमता पर विश्वास रखा