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India Daily

बांग्लादेश में मतदान आज, शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद पहला चुनाव; भारत के लिए क्यों है अहम

12 फरवरी 2026 को बांग्लादेश में 18 महीने बाद पहला आम चुनाव हो रहा है. शेख हसीना के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौर में भारत के साथ रिश्ते सबसे खराब हुए. बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी मुख्य दावेदार हैं. परिणाम 13 फरवरी को आएंगे.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
बांग्लादेश में मतदान आज, शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद पहला चुनाव; भारत के लिए क्यों है अहम
Courtesy: social media

नई दिल्ली: बांग्लादेश आज एक नए दौर की शुरुआत कर रहा है. छात्रों के आंदोलन से शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मोहम्मद युनुस की अंतरिम सरकार ने देश को 18 महीने संभाला. इस दौरान भारत-बांग्लादेश रिश्ते इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए. चीन और पाकिस्तान को फायदा हुआ. आज होने वाला चुनाव सिर्फ ढाका के लिए नहीं, बल्कि भारत के लिए भी बेहद अहम है. क्योंकि 4096 किलोमीटर की सबसे लंबी सीमा इसी पड़ोसी से सटी है. चुनाव के नतीजे दक्षिण एशिया की राजनीति और सुरक्षा को नया आकार दे सकते हैं.

मुख्य खिलाड़ी कौन हैं?

इस बार चुनाव में बांग्लादेश की दो 'बेगम' शेख हसीना और खालिदा जिया बैलट पर नहीं हैं. हसीना भारत में हैं, जबकि खालिदा जिया का दिसंबर में निधन हो गया. अब बीएनपी की कमान उनके बेटे तारिक रहमान के हाथ में है, जो 17 साल बाद लंदन से लौटे हैं. तारिक को सर्वे में अगला प्रधानमंत्री बनने की सबसे ज्यादा संभावना दिख रही है. जमात-ए-इस्लामी भी मजबूत दावेदार है, जिसने छात्रों की नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के साथ गठबंधन किया है. 

चुनाव का मतलब भारत के लिए क्या?

बांग्लादेश भारत के लिए सिर्फ पड़ोसी नहीं, रणनीतिक साझेदार है. हसीना के समय उग्रवादी तत्वों पर काबू रखा गया, सीमा सुरक्षा मजबूत हुई. लेकिन बीएनपी शासन (2001-06) में सीमा अशांत रही. यूनुस सरकार ने चीन-पाकिस्तान से नजदीकी बढ़ाई, जिससे भारत को चिंता है. व्यापार में गिरावट आई, वीजा सेवाएं रुकीं. चीन लालमोनिरहाट एयरबेस, मोंगला पोर्ट और टीस्टा प्रोजेक्ट में सक्रिय है. पाकिस्तान से भी 1971 के बाद पहली बार इतनी निकटता देखी जा रही है. 

भारत के लिए क्या होंगी नई चुनौतियां

भारत ने अब बीएनपी और जमात दोनों से संपर्क बढ़ाया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में गए और तारिक को मोदी का पत्र सौंपा. जमात के साथ भी चार बार बातचीत हुई. जमात ने अपने घोषणापत्र में भारत से 'मित्रवत और सहयोगपूर्ण' रिश्तों की बात की, पाकिस्तान का जिक्र नहीं किया. एक हिंदू उम्मीदवार भी चुनाव में उतारा है. फिर भी हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा, सीमा हत्याएं, पानी बंटवारा और पूर्वोत्तर में अस्थिरता के आरोप रिश्तों में बाधा बने हुए हैं.

क्या है भविष्य की उम्मीद

300 सीटों वाली संसद में बहुमत के लिए 151 सीटें चाहिए. बाकी 50 महिलाओं के लिए आरक्षित हैं. परिणाम 13 फरवरी को आने हैं, लेकिन जुलाई 2025 चार्टर पर जनमत संग्रह से देरी हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट बहुमत वाली सरकार ही बांग्लादेश में स्थिरता ला सकती है. भारत बीएनपी को ज्यादा बेहतर विकल्प मानता है, क्योंकि यह उदार-केंद्रित रुख अपना रही है. लेकिन जो भी सरकार बने, हसीना के प्रत्यर्पण और पुराने विवादों का समाधान जरूरी होगा.