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बांग्लादेश में एक और हिंदू पर हमला, घायल शख्स को किया आग के हवाले

खोकोन दास जब अपने घर लौट रहे थे, तभी अचानक कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया. भीड़ ने बिना किसी उकसावे के उन पर हमला किया.

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Sagar Bhardwaj

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. 31 दिसंबर की देर रात शरियतपुर जिले में 50 वर्षीय खोकोन दास पर उग्र भीड़ ने हमला कर दिया. पहले उन्हें धारदार हथियार से घायल किया गया और बाद में आग के हवाले कर दिया गया. इस घटना में खोकोन दास गंभीर रूप से झुलस गए हैं और उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है.

घर लौटते समय बनाया गया निशाना

जानकारी के मुताबिक, खोकोन दास जब अपने घर लौट रहे थे, तभी अचानक कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया. भीड़ ने बिना किसी उकसावे के उन पर हमला किया. यह घटना इलाके में दहशत फैलाने वाली बताई जा रही है. स्थानीय लोग डरे हुए हैं और अल्पसंख्यक समुदाय में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है.

15 दिनों में चार हिंदू बने निशाना

बीते 15 दिनों में यह चौथी बड़ी घटना है, जिसमें हिंदू समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया है. इससे पहले 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की हत्या कर दी गई थी. 24 दिसंबर को अमृत मंडल की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या हुई थी. कुछ दिन पहले बजेंद्र विश्वास को गोली मार दी गई थी. अब खोकोन दास पर हमला कर उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश की गई.

दीपू दास की हत्या से मचा था हड़कंप

मयमनसिंह जिले के भालुका इलाके में 27 वर्षीय दीपू चंद्र दास को ईशनिंदा के झूठे आरोप में भीड़ ने मार डाला था. अफवाह फैलाकर सैकड़ों लोगों ने उन्हें घेर लिया, बेरहमी से पीटा और फिर पेड़ से बांधकर आग लगा दी. यह घटना पूरे देश में चर्चा का विषय बनी थी.

अमृत मंडल की मॉब लिंचिंग

दीपू की हत्या के एक हफ्ते बाद राजबाड़ी जिले में अमृत मंडल उर्फ सम्राट को भीड़ ने डाकू बताकर पकड़ लिया. दोस्तों के सामने ही उसे पीटा गया और अस्पताल में उसकी मौत हो गई.

मानवाधिकार संगठनों की चिंता

ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM) ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है. संगठन के अनुसार, बीते महीनों में कई जिलों में हिंदू परिवारों के घरों पर हमले, लूटपाट और आगजनी की घटनाएं हुई हैं.

सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था

लगातार हो रहे हमलों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मानवाधिकार संगठन और पीड़ित परिवार अब सरकार से ठोस कार्रवाई और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं.