दुनिया में इस समय भयंकर उथल-पुथल चल रही है. अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है, जिसका खामियाजा पूरे विश्व को उठाना पड़ रहा है. वहीं दूसरी ओर रूस-यूक्रेन के बीच पिछले चार सालों से तनाव जारी है. इसके अलावा मिडिल ईस्ट, सीरिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान समेत कुछ अन्य देशों में भी तनाव बढ़ा हुआ है. हालांकि दूसरी ओर इतनी तबाही के बीच एक नई उम्मीद नजर आ रही है.
भारत के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इस समय बीजिंग यात्रा पर हैं. उनकी इस यात्रा को केवल एक वार्ता नहीं बल्कि भविष्य में होने वाले बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. डोभाल अपनी कूटनीति के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में उनका बीजिंग दौरा को केवल एक वार्ता कहना सही नहीं होगा.
अजित डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ 25वें दौर की वार्ता की. इस दौरान दोनों देशों ने शांति और स्थिरता बनाए रखने की बात की. चीन की ओर से भी इस बातचीत को गहरा और साफ बताया गया. हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भारत और चीन के बीच सारे विवाद सुलझ गए हैं और अब दोनों देश दोस्त बन चुके हैं. लेकिन उनकी इस यात्रा को भविष्य में याद किए जाने वाले ऐतिहासिक पल के रूप में रेखांकित किया जा रहा है.
गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच काफी दूरी आ गई थी. इस तनाव की वजह से दोनों देशों के बीच व्यापार रुक गया था थे और दोनों देश एक दूसरे पर भरोसा नहीं कर रहे थे. हालांकि इस यात्रा ने अब एक नई उम्मीद लाई है. ऐसा नहीं है कि सीमा विवाद सुलझ गया हो, लेकिन हां अब लगभग 3800 किलोमीटर लंबी सीमा पर चल रहे विवाद का समाधान ढूंढने की कोशिश कही जा रही है. अगर ऐसा होता है तो यहां से भारत का भविष्य बदल सकता है.
दुनिया में अभी दुनिया अभी अप्रत्याशित मोड़ पर खड़ी है. अमेरिका और ईरान के कारण वैश्विक तेल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. इसके अलावा ईरान ने अमेरिका के साथ इतने दिनों तक लड़ाई लड़ कर अपनी शक्ति का संदेश पूरी दुनिया को दिया है. ऐसा ही कुछ रूस और यूक्रेन के बीच हो रहा है. मिडिल ईस्ट के कई देशों में अस्थिरता है. वहीं चीन और अमेरिका के बीच अब टेक्नॉलॉजी युद्ध शुरू हो चुका है. दोनों अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं. ऐसे में भारत किसी भी देश के साथ अपने संबंधों को खराब करने के इरादे में नहीं है. भारत की कूटनीतिक नीति एक अलग दौर में चल रही है.
अब भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं है बल्कि अपने लिए कई रास्ते खोल लिए हैं. ऐसे में अगर चीन और भारत के रिश्ते मजबूत होते हैं तो शायद भविष्य में इस दशक को बदलाव के दशक के रूप में याद किया जाएगा. हालांकि अमेरिका की ओर से कभी टैरिफ तो कभी प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, जिससे विकास की रफ्तार तो प्रभावित हो रही है लेकिन भारत और भी मजबूती से अपने फैसले लेने के लिए तैयार हो रहा है.
भारत में सितंबर के महीने में ब्रिक्स सम्मेलन होने जा रहा है. उम्मीद की जा रही है कि इस सम्मेलन में शी जिनपिंग दिल्ली आ सकते हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है लेकिन अगर ऐसा होता है तो भारत, चीन और रूस के प्रतिनिधि एक मंच पर साथ नजर आएंगे और वो मंच भारत का होगा. हालांकि अभी सीधे तौर पर किसी बड़े बदलाव की उम्मीद जल्दबाजी होगी लेकिन अगर होता है तो इसे भारत के लिए बड़ा बदलाव माना जाएगा.