पुतिन-मोदी की मुलाकात के बाद रूस ने भारत को दी तेल में छूट, अब क्या करेंगे डोनाल्ड ट्रंप?
कीमतों में यह अंतर ऐसे समय में बढ़ रहा है जब वाशिंगटन भारत के खिलाफ अपने व्यापारिक हमले को और तेज कर रहा है. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने रूस से बढ़ते तेल आयात के जवाब में भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगा दिया है.
Russian crude oil: अमेरिका से बगिड़ते रिश्ते के बीच भारत और रूस के बीच रिश्ते अच्छे हो रहे हैं. रूसी कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए और भी सस्ता होता जा रहा है. छूट बढ़कर 3-4 डॉलर प्रति बैरल हो गई है. जबकि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मॉस्को से तेल आयात पर नई दिल्ली पर नए टैरिफ लगाए हैं.
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर के अंत और अक्टूबर में कार्गो लोडिंग के लिए रूस के यूराल ग्रेड को कम कीमत पर पेश किया जा रहा है. पिछले हफ्ते यह छूट लगभग 2.50 डॉलर थी, जबकि जुलाई में यह केवल 1 डॉलर थी. इसके विपरीत, भारत को हाल ही में भेजे गए अमेरिकी कच्चे तेल के शिपमेंट में ब्रेंट क्रूड की तुलना में 3 डॉलर का प्रीमियम था, जिससे रूसी तेल की कीमत में बढ़त और मजबूत हुई.
अमेरिका-भारत के बीच टैरिफ और तनाव
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कीमतों में यह अंतर ऐसे समय में बढ़ रहा है जब वाशिंगटन भारत के खिलाफ अपने व्यापारिक हमले को और तेज कर रहा है. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने रूस से बढ़ते तेल आयात के जवाब में भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगा दिया है. अन्य उत्पादों पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगा दिया गया है, जिससे पहले से ही तनावपूर्ण व्यापारिक संबंधों में और तनाव बढ़ गया है.
डोनाल्ड ट्रम्प के सलाहकार का बयान
इस कदम का बचाव करते हुए डोनाल्ड ट्रम्प के सलाहकार पीटर नवारो ने भारत के रिफाइनरियों पर मास्को के युद्ध प्रयासों को अप्रत्यक्ष रूप से वित्तपोषित करने का आरोप लगाया. नवारो ने कहा, "पुतिन के यूक्रेन पर आक्रमण से पहले, भारत रूसी तेल खरीदने की बात तो दूर, बहुत ही कम मात्रा में तेल खरीदता था. क्या हुआ? अब, रूस छूट देते हैं, भारत उसका लाभ उठाता है और फिर उसे यूरोप, अफ्रीका और एशिया को प्रीमियम पर बेचता है. इससे रूसी युद्ध मशीन को ईंधन मिलता है.
दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक, भारत ने 2022 से रूस से कच्चे तेल की खरीद में वृद्धि की है. आयात भारत के तेल बास्केट के 1% से बढ़कर लगभग 40% हो गया है. 2024-25 में, रूस भारत के 5.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन के 36% की आपूर्ति करेगा और इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका को पीछे छोड़ देगा.