'बेटे से आंदोलन वापस लेने को नहीं कहेंगे': CJP प्रमुख अभिजीत दीपके के माता-पिता बोले- लाठीचार्ज ने तोड़ दिया दिल

दिल्ली में CJP के ‘चलो संसद’ मार्च पर पुलिस कार्रवाई के बाद अभिजीत दीपके के माता-पिता ने सरकार की आलोचना की. उन्होंने बेटे का समर्थन करते हुए आंदोलन वापस लेने से इनकार किया.

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Sagar Bhardwaj

दिल्ली में ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के माता-पिता ने बेटे के आंदोलन का समर्थन किया है. अभिजीत के पिता भगवान दीपके ने कहा कि उन्हें बेटे की सुरक्षा को लेकर चिंता जरूर है, लेकिन वे उसे आंदोलन वापस लेने के लिए नहीं कहेंगे. उनका कहना था कि अभिजीत ने यह आंदोलन अपनी सोच और जिम्मेदारी के साथ शुरू किया है, इसलिए अब परिवार उस पर पीछे हटने का दबाव नहीं बनाएगा. उन्होंने केंद्र सरकार की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए.

मां बोलीं- छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों?

अभिजीत की मां अनीता दीपके ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि 18 से 20 वर्ष के छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि ये युवा पिछले एक महीने से अपने भविष्य को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उन पर लाठीचार्ज किया गया. अनीता ने बताया कि जब उन्होंने मोबाइल पर कार्रवाई के वीडियो देखे तो उनकी आंखें नम हो गईं. उनके अनुसार सरकार को बल प्रयोग करने के बजाय छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए था.

पिता ने सरकार पर लगाया अहंकार का आरोप

महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) से सेवानिवृत्त इंजीनियर भगवान दीपके ने कहा कि सोमवार की घटना सरकार के अहंकारी रवैये को दर्शाती है. उनके अनुसार प्रदर्शन में शामिल छात्र शिक्षित थे और उन्होंने हिंसा या उपद्रव का रास्ता नहीं अपनाया था. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की कार्रवाई ने हालात बिगाड़े और शांतिपूर्ण आंदोलन को टकराव की स्थिति में पहुंचा दिया. उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने से सरकार में जवाबदेही की भावना कमजोर पड़ जाती है.


पुलिस का दावा- प्रदर्शन हुआ हिंसक

वहीं, दिल्ली पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम पर अलग तस्वीर पेश की है. पुलिस के अनुसार ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी आक्रामक हो गए, सुरक्षा बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और पुलिसकर्मियों पर हमला किया. पुलिस का दावा है कि इस झड़प में 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए. बयान के मुताबिक, बार-बार चेतावनी देने और निषेधाज्ञा की जानकारी देने के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे. इसी के बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया. फिलहाल इस घटना को लेकर राजनीतिक बहस तेज है, जहां एक पक्ष इसे छात्रों के अधिकारों पर चोट बता रहा है, वहीं पुलिस अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम बता रही है.