नई दिल्ली: देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आने वाला है. केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण को लागू करने के लिए लोकसभा की कुल सीटें बढ़ाने की योजना बना रही है. मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 816 किया जाएगा, जिसमें 273 नई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. इससे लोकसभा में बहुमत का आंकड़ा भी 409 हो जाएगा. यह कदम 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को जल्द लागू करने की दिशा में उठाया जा रहा है. सरकार बजट सत्र में ही दो बड़े विधेयक पेश करने वाली है.
सरकार की योजना के मुताबिक लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर 816 हो जाएंगी. यानी 273 नई सीटें जोड़ी जाएंगी. इनमें से ज्यादातर सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखी जाएंगी. इससे पुरुष सांसदों की मौजूदा सीटों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. पिछले 50 सालों में यह पहली बार होगा जब लोकसभा की सीटों में इतना बड़ा इजाफा किया जा रहा है. राज्यसभा और विधान परिषदों की सदस्य संख्या पर भी इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. इस वृद्धि से संसद में महिलाओं की भागीदारी काफी बढ़ जाएगी और राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल सकता है.
महिला आरक्षण को नई जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया था, लेकिन नई जनगणना में समय लग सकता है. इसलिए सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर ही नया परिसीमन कराने पर विचार कर रही है. इसका मकसद 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों में महिला कोटा लागू करना है. इस प्लान से दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंता भी दूर हो गई है. सरकार ने फैसला लिया है कि हर राज्य की सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जिससे उनका आनुपातिक प्रतिनिधित्व बरकरार रहेगा.
उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी. बिहार में 40 से 60, जबकि केरल में 20 से 30 सीटें हो जाएंगी. इसी अनुपात में अनुसूचित जाति की सीटें 84 से बढ़कर 126 और अनुसूचित जनजाति की सीटें 47 से बढ़कर 70 हो जाएंगी. छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जहां केवल एक या दो सीटें हैं, वहां हर तीसरे चुनाव में रोटेशन के आधार पर महिलाओं के लिए सीट आरक्षित की जाएगी. इस व्यवस्था से सभी राज्यों के बीच संतुलन बना रहेगा और कोई भी राज्य पीछे नहीं रहेगा.
संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है. NDA के पास अकेले यह बहुमत नहीं है, इसलिए गृह मंत्री अमित शाह लगातार बैठकें कर रहे हैं. उन्होंने NDA सहयोगी दलों के अलावा सपा, शिवसेना (UBT), बीजेडी और YSR कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों से भी बात की है. कांग्रेस और वामपंथी दलों ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है. कई पार्टियां महिला आरक्षण के अंदर OBC महिलाओं के लिए अलग कोटा की भी मांग कर रही हैं. TMC ने अमित शाह की बैठक से दूरी बना ली है.
सरकार 4 अप्रैल को खत्म हो रहे बजट सत्र में इन विधेयकों को पास कराने की कोशिश कर रही है. अगर जरूरत पड़ी तो सत्र बढ़ाया जा सकता है या महिला आरक्षण के लिए अलग छोटा सत्र भी बुलाया जा सकता है. अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक हुआ तो 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को एक-तिहाई सीटें मिल जाएंगी. यह फैसला भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को नई ऊंचाई देगा और आने वाले सालों में संसद का चेहरा पूरी तरह बदल सकता है.