'21वीं सदी का सबसे बड़ा फैसला', महिला आरक्षण पर बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के लिए आरक्षण को 21वीं सदी के सबसे बड़े फैसलों में से एक बताया. नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में उन्होंने कहा कि यह कदम महिलाओं की सशक्तिकरण के लिए समर्पित है और 2029 तक लागू करने की मांग पर सभी दलों का सहमति है.

ani
Kuldeep Sharma

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को संबोधित करते हुए महिलाओं के आरक्षण विधेयक को 21वीं सदी का एक अहम फैसला करार दिया. उन्होंने इसे नारी शक्ति के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया और कहा कि संसद जल्द ही नई इतिहास रचने वाली है. इस मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी मौजूद रहीं. प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि दशकों से चली आ रही मांग अब पूरी होने की राह पर है और सभी राजनीतिक दल इसमें सहयोग करेंगे.

21वीं सदी का महत्वपूर्ण निर्णय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में कहा कि देश विकास की राह पर कई अहम पड़ाव पार कर चुका है और अब 21वीं सदी के सबसे बड़े फैसलों में से एक लेने जा रहा है. उन्होंने जिम्मेदारी के साथ यह बात कही कि महिलाओं के आरक्षण का यह कदम नारी शक्ति को समर्पित है. यह फैसला पुरानी सोच को हकीकत में बदल देगा और सामाजिक न्याय को शासन की मूल भावना बना देगा. मोदी जी ने बताया कि संसद 16, 17 और 18 अप्रैल को इस मुद्दे पर चर्चा करेगी. उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी दल राजनीति से ऊपर उठकर महिलाओं के हित में एकजुट होंगे. इस पहल से लोकतंत्र और मजबूत होगा क्योंकि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से फैसले ज्यादा संतुलित और समावेशी बनेंगे. दशकों की प्रतीक्षा अब खत्म होने वाली है.

नारी शक्ति का सम्मान

मोदी ने आगे कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं की शक्ति का सम्मान है. यह कदम देश को समानता वाले भारत की ओर ले जाएगा जहां सामाजिक न्याय सिर्फ नारा नहीं बल्कि काम करने का तरीका बनेगा. उन्होंने याद दिलाया कि पिछले चार दशकों से सभी पार्टियां इस मुद्दे पर अपनी-अपनी भूमिका निभाती रही हैं. अब समय आ गया है कि इसे अमल में लाया जाए. प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि 2029 तक इस कानून को लागू करने की सर्वसम्मति है. सम्मेलन में शामिल महिलाओं और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने इस प्रयास का स्वागत किया. इससे महिलाओं को विधानसभाओं और संसद में एक तिहाई सीटें मिल सकेंगी जो उनके सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा बदलाव लाएगा. 

सभी दलों का सहयोग जरूरी

प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि हर पार्टी ने इस विचार को आगे बढ़ाया है और अब इसे पूरा करने का मौका है. उन्होंने कहा कि संसद में 16 अप्रैल से विस्तृत चर्चा होगी और सभी को मिलकर काम करना चाहिए ताकि सदन की गरिमा बढ़े. हर महिला खुश होगी कि राजनीति से ऊपर उठकर यह काम उनके भले के लिए हो रहा है. मोदी जी ने विकास यात्रा के बीच इस फैसले को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयास से महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और देश की प्रगति में नई ऊर्जा आएगी. यह कदम न सिर्फ वर्तमान बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा. 

भविष्य की दिशा

इस सम्मेलन का मकसद 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को अमल में लाने के लिए समर्थन जुटाना था. प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों की प्रतीक्षा खत्म करने का समय आ गया है. राज्य विधानसभाओं से लेकर संसद तक महिलाओं को आरक्षण मिलेगा. उन्होंने सभी से अपील की कि 2029 की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए यह काम पूरा किया जाए. विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को खास बना दिया. मोदी जी का मानना है कि इससे भारत एक समानता वाला और न्यायपूर्ण समाज बनेगा जहां हर वर्ग की आवाज सुनी जाएगी.