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हार का डर या कुछ और है बात! दो विधानसभा सीट से चुनाव क्यों लड़ रहे हैं उमर अब्दुल्ला?

Jammu Kashmir Assembly Elections: पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला हाल ही में लोकसभा का चुनाव हारे हैं. इस बार वह विधानसभा चुनाव में एक नहीं दो-दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं. वह कहते हैं कि यह दिखाता है कि एनसी मजबूत है. बताते चलें कि इस बार सीटें चुनने में उनकी पार्टी ने कई बातों का ख्याल भी रखा है.

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हार का डर या कुछ और है बात! दो विधानसभा सीट से चुनाव क्यों लड़ रहे हैं उमर अब्दुल्ला?
Courtesy: NC X Handle

जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले तक उमर अब्दुल्ला कह रहे थे कि वह चुनाव  नहीं लड़ेंगे. अब वह एक नहीं दो-दो सीटों से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं. अभी कुछ महीने पहले ही हुए लोकसभा चुनाव में उन्हें हार मिली थी जिसके चलते यह भी कहा जा रहा है कि वह विधानसभा चुनाव पहुंचने के लिए दो सीटों से लड़ रहे हैं. वहीं, इस पर उमर अब्दुल्ला का कहना है कि यह नेशनल कॉन्फ्रेंस की ताकत है कि वह दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं. बताते चलें कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं लेकिन नए सिरे से हुए परिसीमन के बाद वह लोकसभा का चुनाव हार गए.

इस बार के विधानसभा चुनाव के बारे में उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'गुपकर गठबंधन क्यों टूटा इसके बारे में महबूबा मुफ्ती से पूछिए. मैंने उनको नहीं कहा था कि वह इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार के सामने अपना कैंडिडेट उतारें.' बता दें कि इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस मिलकर चुनाव लड़ रही हैं जबकि महबूबा मुफ्ती की पीडीपी अलग होकर चुनाव लड़ रही है. 

अनुच्छेद 370 पर क्या बोले उमर अब्दुल्ला?

गांदरबल और बडगाम दो सीटों से लड़ने के सवाल पर उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'बारामुला के लोकसभा चुनाव में जो हुआ उसके बाद यह जरूरी हो गया कि हम दिखाएं कि हम जीतने वाली पार्टी हैं. बडगाम सीट बारामुला लोकसभा सीट का हिस्सा है. 6 साल तक मैं गांदरबल सीट से ही विधायक रहा.' अनुच्छेद 370 की वापसी के बारे में उन्होंने भी अपने पिता फारूक अब्दुल्ला की बात ही दोहराई की इसमें बहुत ज्यादा समय लग जाएगा. इससे पहले, फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि इसमें 100 साल लग जाएंगे.

इससे पहले साल 2014 में उमर अब्दुल्ला ने बडगाम से ही लगी बीरवाह सीट से चुनाव जीता था और वहीं से विधायक रहे. इस बार उन्होंने गांदरबल से पर्चा भरने के बाद कश्मीर के लोगों से अपील करते हुए कहा, 'अब मेरी इज्जत आपके हाथ में है.' उनका कहना है, 'नेशनल कॉन्फ्रेंस के पक्ष में लहर है और हम लोग देखेंगे कि जिस दिन वोट गिने जाएंगे, हम कामयाब होंगे.'

गौरतलब है कि इसी गांदरबल सीट से नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक और उमर अब्दुल्ला के दादा शेख अब्दुल्ला चुनाव जीतते थे. फिर फारूक अब्दुल्ला ने भी गांदरबल का प्रतिनिधित्व किया. 2002 में उमर अब्दुल्ला इसी सीट से अपना पहला चुनाव हार भी गए थे. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में भले ही वह बारामुला सीट से हार गए हों लेकिन बडगाम विधानसभा सीट में वह आगे थे और बीरवाह में पीछे थे. यही वजह है कि इस बार उन्होंने बीरवाह की जगह पर बडगाम से चुनाव लड़ने का फैसला किया.