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'अहंकार न पालें, भगवान न बनें,' मणिपुर हिंसा पर किसे सुना गए मोहन भागवत?

Manipur Violence: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने मणिपुर हिंसा में चिंता जताई है. उन्होंने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता मैतेई और कुकी दोनों समुदायों से बातचीत कर रहे हैं. संघ प्रमुख ने कहा है कि राज्य में स्थितियां कठिन हैं, लोग अपनी सुरक्षा को लेकर खौफ के साए में हैं. कारोबारियों और समाजसेवियों के लिए ज्यादा मुश्किलों वाली स्थितियां हैं.

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'अहंकार न पालें, भगवान न बनें,' मणिपुर हिंसा पर किसे सुना गए मोहन भागवत?
Courtesy: Creative Image

Mohan Bhagwat on Manipur Violence: राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने मणिपुर हिंसा (Manipur Violence) पर देश को आगाह किया है. उन्होंने कहा है कि मणिपुर में हालात अभी ठीक नहीं हैं, लोग अपनी सुरक्षा को लेकर डर के साए में हैं. मोहन भागवत ने कहा है कि विपरीत परिस्थितियों के बाद भी संघ के स्वयंसेवक, मैतेई और कुकी समुदाय के लोगों के बीच सामांजस्य बिठाने की कोशिसें कर रहे हैं. 

मोहन भागवत ने कहा कि मणिपुर से संघ के कार्यकर्ता न मैदान छोड़कर बागे, न ही वहां मूक दर्शक बनकर बैठे रहे. स्वंय सेवक हिंसाग्रस्त मणिपुर में आपसी सौहार्द बढ़ाने, नफरत कम करने और राष्ट्रीय एकता की भावना में सबको पिरोने के लिए काम कर रहे हैं.

'भगवान आप बने हैं, तय लोगों को करने दीजिए'

मोहन भागवत ने कहा कि अगर आप सफल हो गए हैं तो भगवान बनने की कोशिश न करें. आप भगवान बने हैं या नहीं, इसका फैसला लोग करेंगे. आपको खुद नहीं बोलना चाहिए कि आप भगवान बन गए हैं. अच्छा काम करने से हर कोई सम्मानित बन सकता है लेकिन हमारा स्तर क्या है, यह फैसला दूसरे करते हैं. हमें कभी ऐलान नहीं करना चाहिए हम भगवान बन गए हैं.  उन्होंने कहा कि जो अहंकार नहीं पालता है, मर्यादा पालन करता है, वही सेवक कहलाने का अधिकारी है.' 

मणिपुर में NGO नहीं संभाल सकते हैं हालात

मोहन भागवत ने गुरुवार को ये बातें शंकर दिनकर काने की 100वीं जयंती पर कही हैं. उन्होंने कहा कि शंकर दिनकर 1971 तक मणिपुर के बच्चों को शिक्षित करने में जुटे थे. संघ के कार्यकर्ता, उनके पदचिह्नों पर चलकर हिंसा की आशंका के बाद भी वहां डटे हैं. मणिपुर में NGO सब नहीं संभाल सकते हैं. संघ वहां हालात सामान्य करने की कोशिश की है, इसलिए लोगों ने भरोसा जताया है.