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G7 को क्यों है भारत की जरुरत? सदस्य नहीं होने के बावजूद इस वजह से हर बार आता है बुलावा

जी7 का सदस्य न होने के बावजूद भारत को लगातार शिखर सम्मेलनों में आमंत्रित किया जाता है. इसकी वजह देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, युवा आबादी, रणनीतिक महत्व और वैश्विक मामलों में बढ़ता प्रभाव है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी7 का शिखर सम्मेलन मंगलवार से फ्रांस के एवियन में शुरू हो गया है. इस सम्मेलन में भारत को भी विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन में हिस्सा लेकर विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शीर्ष नेताओं के साथ अहम वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे.

जी7 समूह में अमेरिका, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, जापान, इटली और कनाडा शामिल हैं. यह दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का मंच माना जाता है. भारत इस समूह का औपचारिक सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से उसे लगातार शिखर सम्मेलनों में आमंत्रित किया जा रहा है.

भारत की आर्थिक ताकत बनी बड़ी वजह

भारत को लगातार मिल रहे निमंत्रणों के पीछे उसकी तेजी से बढ़ती आर्थिक शक्ति को प्रमुख कारण माना जाता है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. कई विकसित देशों की तुलना में भारत की विकास दर अधिक है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसकी हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है.


भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन चुका है. देश की बड़ी कामकाजी आबादी और विशाल युवा वर्ग इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बनाते हैं. कुशल और अर्धकुशल मानव संसाधन के कारण भारत निवेश, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभरा है.

इंडो पैसिफिक रणनीति में भारत की अहम भूमिका

पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और अन्य पश्चिमी देशों ने इंडो पैसिफिक क्षेत्र को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल किया है. इस क्षेत्र में भारत की भौगोलिक स्थिति और प्रभाव उसे एक महत्वपूर्ण भागीदार बनाते हैं. यही कारण है कि वैश्विक सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन से जुडी चर्चाओं में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है.

संतुलित विदेश नीति ने बढ़ाया भरोसा

भारत की विदेश नीति लंबे समय से रणनीतिक संतुलन पर आधारित रही है. भारत ने किसी एक शक्ति समूह के साथ पूरी तरह जुड़ने के बजाय स्वतंत्र और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया है. पश्चिमी देशों के साथ मजबूत संबंध होने के बावजूद भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लिए हैं. इस नीति ने वैश्विक मंचों पर उसकी विश्वसनीयता को मजबूत किया है.

वैश्विक शक्ति संतुलन में हो रहा बदलाव

विशेषज्ञों का मानना है कि विश्व अर्थव्यवस्था और राजनीति का केंद्र धीरे धीरे बदल रहा है. एक समय दुनिया की कुल जीडीपी में जी7 देशों की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत थी, लेकिन अब यह काफी कम हो चुकी है. उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत को भविष्य की वैश्विक व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जा रहा है.

क्या भविष्य में जी7 का सदस्य बन सकता है भारत?

कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में जी7 के विस्तार पर चर्चा हो सकती है. भारत का बढ़ता आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव उसे संभावित सदस्य देशों की सूची में मजबूत दावेदार बनाता है. हालांकि इस संबंध में अभी कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है.

13वीं बार जी7 सम्मेलन में शामिल होगा भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर इस वर्ष जी7 शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं. यह लगातार 13वीं बार है जब भारत को इस मंच पर आमंत्रित किया गया है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह वैश्विक शांति, सुरक्षा, विकास और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान में भारत के बढ़ते योगदान की अंतरराष्ट्रीय मान्यता को दर्शाता है.