BRICS में क्यों शामिल हुए सऊदी अरब और UAE? समझिए पूरी रणनीति

BRICS के विस्तार में सऊदी अरब और UAE का शामिल होना सिर्फ आर्थिक फैसला नहीं है. दोनों खाड़ी देश अमेरिका से पुराने रिश्ते बनाए रखते हुए चीन, भारत और रूस के साथ भी अपने संबंध मजबूत करना चाहते हैं.

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Shanu Sharma

नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए सदस्य देशों के नेता जुट रहे हैं. इसी बीच सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE की BRICS सदस्यता एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ हुई थी. बाद में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से इसका नाम BRICS पड़ा. 

इसके बाद साल 2024 में समूह का विस्तार हुआ और मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE इसमें शामिल हुए. इन दोनों खाड़ी देशों का समूह से जुड़ना बदलती वैश्विक व्यवस्था में उनकी रणनीति को दिखाता है. वे अपनी विदेश नीति को किसी एक शक्ति तक सीमित रखने के बजाय कई बड़े देशों के साथ संबंध मजबूत करना चाहते हैं.

अमेरिका से रिश्ते बरकरार, लेकिन विकल्प भी जरूरी

सऊदी अरब और UAE के अमेरिका के साथ लंबे समय से मजबूत सुरक्षा और आर्थिक संबंध हैं. दोनों देश अमेरिकी हथियारों, पश्चिमी वित्तीय व्यवस्था और ऊर्जा कारोबार से भी जुड़े रहे हैं. लेकिन बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच खाड़ी देश अब अपने विकल्प बढ़ाना चाहते हैं.


BRICS की सदस्यता उन्हें चीन, भारत, रूस और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ सहयोग का अतिरिक्त मंच देती है. इसका अर्थ यह नहीं है कि दोनों देश अमेरिका से दूरी बना रहे हैं. बल्कि उनकी कोशिश अलग-अलग वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन कायम करने की है.

तेल और गैस के लिए बड़े बाजार का फायदा

इस रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ऊर्जा है. सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल है, जबकि UAE भी तेल और गैस के क्षेत्र में प्रभावशाली भूमिका रखता है. दूसरी ओर चीन और भारत दुनिया के बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में हैं. ऐसे में BRICS खाड़ी के ऊर्जा उत्पादकों और एशिया के बड़े खरीदारों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने का मंच बन सकता है. इससे सऊदी अरब और UAE को अपने ऊर्जा बाजार को ज्यादा विविध बनाने का अवसर मिलता है. भविष्य में रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में भी सहयोग बढ़ सकता है.

भारत और चीन के साथ आर्थिक रिश्ते अहम

चीन खाड़ी देशों का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है. चीन की ऊर्जा जरूरत और सऊदी अरब-UAE की तेल-गैस क्षमता दोनों को एक-दूसरे के करीब लाती है. भारत के साथ भी इन देशों के संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं. भारत के साथ ऊर्जा, व्यापार, निवेश, समुद्री संपर्क और प्रवासी भारतीयों से जुड़े हित हैं. UAE में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं और दोनों देशों के बीच कारोबारी संबंध लगातार बढ़े हैं. BRICS के जरिए इन द्विपक्षीय रिश्तों को बहुपक्षीय सहयोग का नया आधार मिल सकता है.