Ganesh Chaturthi 2026: गणेशजी को लाल सिंदूर ही क्यों चढ़ाया जाता है? जानिए बप्पा के इस प्रिय चढ़ावे का रहस्य
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा, मोदक और सिंदूर का विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बप्पा को उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित करने से भक्तों को सुख समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद मिलता है.
नई दिल्ली: गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित प्रमुख त्योहारों में से एक है. इस दौरान भक्त विधि विधान से गणपति की पूजा करते हैं और उन्हें उनकी प्रिय मानी जाने वाली चीजें अर्पित करते हैं. मान्यता है कि श्रद्धा के साथ की गई पूजा से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और घर में सुख शांति बनी रहती है. गणपति को विघ्नहर्ता कहा जाता है, इसलिए भक्त उनसे जीवन की बाधाएं दूर करने और परिवार में समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं.
दूर्वा के बिना अधूरी मानी जाती है गणेश पूजा
भगवान गणेश को दूर्वा बेहद प्रिय मानी जाती है. इसी वजह से गणेश पूजा में इसे विशेष स्थान दिया गया है. भक्त बप्पा को 11 या 21 दूर्वा अर्पित कर सकते हैं. छोटी छोटी गांठों वाली दूर्वा चढ़ाना शुभ माना जाता है. कुछ लोग गणपति को दूर्वा की माला भी अर्पित करते हैं. पूजा के दौरान श्रद्धा से दूर्वा चढ़ाते हुए ‘ॐ गं गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करने की परंपरा भी बताई गई है.
लाल सिंदूर को लेकर क्या है मान्यता?
गणेशजी को लाल सिंदूर चढ़ाने की परंपरा काफी खास मानी जाती है. धार्मिक मान्यताओं में सिंदूर को शुभता और सौभाग्य से जोड़ा गया है. गणपति को शुभता का देवता माना जाता है, इसलिए उनके पूजन में लाल सिंदूर का इस्तेमाल किया जाता है. भक्त श्रद्धा के साथ बप्पा को सिंदूर अर्पित करते हैं और उनसे जीवन के संकट दूर करने की कामना करते हैं. इसी वजह से गणेश पूजा में सिंदूर को महत्वपूर्ण चढ़ावे के तौर पर देखा जाता है.
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मोदक के बिना कैसे पूरी होगी बप्पा की भोग की थाली?
मोदक का नाम आते ही भगवान गणेश की पूजा का ख्याल आता है. इसे गणपति का प्रिय भोग माना जाता है. मोदक का मीठा स्वाद आनंद और प्रसन्नता का प्रतीक माना जाता है. भक्त गणेशजी को मोदक का भोग लगाकर बुद्धि और सफलता की कामना करते हैं. पूजा पूरी होने के बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करना भी शुभ माना जाता है. गणेश चतुर्थी के दौरान घरों में खास तौर पर मोदक तैयार किए जाते हैं.
गणेशजी को प्रिय चीजें चढ़ाने की क्या है मान्यता?
गणेश चतुर्थी पर बप्पा को उनकी पसंदीदा मानी जाने वाली वस्तुएं अर्पित करने की परंपरा है. दूर्वा, सिंदूर और मोदक इनमें प्रमुख हैं. मान्यता है कि पूजा में इन चीजों को सही भावना और श्रद्धा के साथ शामिल करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं. भक्तों का विश्वास है कि उनकी कृपा से जीवन की अड़चनें दूर होती हैं और घर में सकारात्मकता, सुख शांति तथा समृद्धि का वातावरण बना रहता है.
पूजा में सबसे जरूरी है श्रद्धा और सही भावना
गणपति पूजन में केवल सामग्री ही नहीं, बल्कि भक्त की श्रद्धा को भी महत्वपूर्ण माना जाता है. गणेश चतुर्थी के दौरान लोग विधि विधान से पूजा कर बप्पा का आशीर्वाद लेते हैं. दूर्वा अर्पित करना, सिंदूर चढ़ाना और मोदक का भोग लगाना इसी पूजा परंपरा का हिस्सा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश को सच्चे मन से याद करने और उनकी पूजा करने से भक्तों को बाधाओं से मुक्ति, सफलता और परिवार के लिए सुख समृद्धि की कामना का अवसर मिलता है.
Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.