कौन हैं भारतीय वायु सेना की फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनकर? जिन्होंने गणतंत्र दिवस परेड में राष्ट्रपति के साथ फहराया तिरंगा

77वें गणतंत्र दिवस पर भारतीय वायु सेना की फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ कर्तव्य पथ पर नजर आईं. हरियाणा की इस बेटी की यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई.

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Anuj

नई दिल्ली: 26 जनवरी को पूरे देश ने 77वां गणतंत्र दिवस गर्व और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित मुख्य समारोह में एक खास चेहरे ने सबका ध्यान खींचा.

भारतीय वायुसेना की फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता झनकर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने का गौरव मिला. यह क्षण उनके लिए सम्मान ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का भी प्रतीक रहा.

कर्तव्य पथ का यादगार पल

फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनकर ने इस अनुभव को गर्व और जिम्मेदारी से भरा बताया. उन्होंने कहा कि दो महीने से ज्यादा समय तक कठिन अभ्यास किया गया. रोज सुबह जल्दी उठना और देर से लौटना आसान नहीं था. लेकिन यह सब देश सेवा के लिए था. उनके अनुसार, सशस्त्र बल साहस, एकता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक हैं. 

हरियाणा से दिल्ली तक का सफर

अक्षिता धनकर का जन्म हरियाणा के कसनी गांव में हुआ. यह इलाका अपनी सैन्य परंपरा और देशभक्ति के लिए जाना जाता है. बचपन से ही गणतंत्र दिवस परेड उन्हें आकर्षित करती थी. इसी प्रेरणा ने उन्हें देश की सेवा करने का सपना देखने के लिए प्रेरित किया.

एनसीसी से मिली दिशा

अक्षिता ने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से पढ़ाई की. यहीं उन्होंने राष्ट्रीय कैडेट कोर में प्रवेश लिया. एनसीसी में उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और कैडेट सार्जेंट मेजर का पद हासिल किया. इस अनुभव ने उन्हें भारतीय सशस्त्र बलों में जाने के लक्ष्य के और करीब ला दिया.

वायुसेना में चयन कैसे हुआ?

कॉलेज के बाद अक्षिता ने एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट दिया. उन्होंने परीक्षा शानदार अंकों से पास की और मैसूरु में एयर फोर्स सेलेक्शन बोर्ड पहुंचीं. अक्षिता का चयन प्रशासन (एडीएम) शाखा के लिए हुआ था. 

योग्यता के आधार पर फ्लाइट लेफ्टिनेंट

17 जून 2023 को अक्षिता धनकर को फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में कमीशन मिला. बाद में योग्यता के आधार पर उन्हें फ्लाइट लेफ्टिनेंट बनाया गया. वर्तमान में वह भारतीय वायुसेना की प्रशासनिक शाखा में कार्यरत हैं. कार्मिक प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स और संगठनात्मक समन्वय में उनकी भूमिका वायुसेना की तैयारियों को मजबूत करती है.