West Bengal Assembly Election 2026

उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में पेश हुआ UCC बिल, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए रजिस्ट्रेशन होगा मेंडेटरी

गुजरात कैबिनेट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026 बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी. जिसके बाद इसे विधानसभा में पेश किया जा रहा है. इस बिल के पास होने के बाद गुजरात UCC लागू करने वाला दूसरा देश बन गया.

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Shanu Sharma

गुजरात सरकार भी समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. राज्य कैबिनेट ने 'गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026' बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी दी. अब यह बिल विधानसभा में पेश किया जा चुका है. उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का दूसरा राज्य बनेगा, जहां सभी समुदायों के लिए एक समान व्यक्तिगत कानून लागू होगा.

गुजरात से पहले उत्तराखंड में UCC लागू हो चुका है. इसका बिहल का मुख्य उद्देश्य शादी, तलाक, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में अलग-अलग समुदायों के पर्सनल लॉ को खत्म करना है. साथ ही सभी नागरिकों को एक नियम में बांधने की तैयारी की जा रही है. हालांकि इस बिल को अनुसूचित जनजातियों पर यह लागू नहीं किया जाएगा.

क्या कहता है UCC नियम?

इस बिल के अनुसार, शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा. इस बिल के मुताबिक धार्मिक रीति-रिवाजों की अनुमति रहेगी, लेकिन बिना रजिस्ट्रेशन के शादी मान्य नहीं होगी. उल्लंघन पर 10,000 रुपये तक जुर्माना लग सकता है. इसके अलावा इस नियम के मुताबिक बहुविवाह पर पूरी रोक लगेगी और ऐसा करने वाले को 7 साल तक की जेल हो सकती है. इसके अलावा तलाक केवल कोर्ट से मिल सकता है. कोर्ट के आदेश के बिना तलाक वैध नहीं माना जाएगा. साथ ही ऐसा करने वालों के खिलाफ 3 साल तक की जेल हो सकती है. इतना ही नहीं इस UCC में साफ कहा गया है कि शादी अगर टूट जाए और कोई दोबारा उसी इंसान से करना चाहे तो बिना किसी शर्त के कर सकता है. इस नियम के मुताबिक 'हलाला' जैसी प्रथाओं पर रोक रहेगी .

लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का क्या है नियम?

इस कानून के मुताबिक लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा. वे जिला रजिस्ट्रार को अपना बयान जमा करेंगे. वहीं अगर किसी भी कारण से उनका रिलेशनशिप खत्म होता है तो इसकी सूचना भी उन्हें देनी होगी. कानून में साफ कहा गया है कि लिव-इन से जन्मा बच्चा वैध माना जाएगा. वहीं अगर रिश्ते में रहने के बाद यदि पुरुष अपनी पार्टनर को छोड़ दे, तो महिला गुजारा भत्ता मांग सकेगी. कानून के मुताबिक शादी की न्यूनतम उम्र पुरुषों के लिए 21 साल और महिलाओं के लिए 18 साल रहेगी. वहीं गलत जानकारी देने पर शादी रद्द करने का भी प्रावधान रखा गया है. इस नियम को पहले ही उत्तराखंड में लागू किया गया है. अगर गुजरात में भी इसे लागू कर दिया जाता है तो UCC लागू करने वाला यह दूसरा राज्य बन जाएगा.