Independence Day Special: पहले स्वतंत्रता दिवस में नहीं शामिल हुए थे महात्मा गांधी, जानिए वो कहां थे
Mahatma Gandhi: हम सभी को पता है कि महात्मा गांधी ने भारत को आजाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उनके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता है. अहिंसा के मार्ग पर चलकर उन्होंने देश को आजाद करा दिया था.
नई दिल्ली. आज भारत अपनी आजादी का 77 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. पूरा देश जश्न में सराबोर है. वो तारीख 15 अगस्त 1947 भारतीय इतिहास की सबसे खूबसूरत तस्वीर थी. हम अंग्रेजों के 200 साल के शासन से मुक्त हो गए थे. हिंदुस्तान की जनता खुली हवा में सास ले रही थी. देश को आजादी कराने वाले लोगों के चेहरों पर प्यारी सी मुस्कुराहट थी. आजादी के एक चेहरों में महात्मा गांधी का भी चेहरा था. पहले स्वतंत्रता दिवस समारोह में महात्मा गांधी नहीं शामिल हुए थे. क्या आपको पता है कि जब लाल किले से तिरंगा झंडा फहराया जा रहा था तो महात्मा गांधी कहां थे? अगर नहीं तो कोई बात नहीं आज हम आपको इसकी कहानी बताएंगे.
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हम सभी को पता है कि महात्मा गांधी ने भारत को आजाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उनके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता है. अहिंसा के मार्ग पर चलकर उन्होंने देश को आजाद करा दिया था. अंग्रेजों को आखिरकार घुटने टेकने ही पड़ गए थे. हजारों, लाखों नेताओं की मेहनत ने 15 अगस्त 1947 को आजादी का स्वाद चखा. जिसके लिए वो कई वर्षों से कड़ी मेहनत कर रहे थे आखिरकार वो दिन आ गया था.
कहां थे महात्मा गांधी?
अंग्रेजों के चंगुल से आजाद होकर हिंदुस्तान अपनी एक नई परिभाषा लिखने के लिए पूरी तरह से तैयार था. 15 अगस्त 1947 को दिल्ली में एक से एक बड़े लोग एकत्रित हुए लेकिन गांधी जी नहीं थे. दरअसल, इस दिन वो बंगाल में थे. जिस हिस्से में महात्मा गांधी थे आज वो बांग्लादेश के हिस्से में है. उस जगह का नाम था नोआखली.
महात्मा गांधी के नोआखली में होने के पीछे का कारण था हिंदू-मुस्लिम विवाद. आजादी की वजह से उपजे सांप्रदायिक दंगों को रोकने के प्रयास के लिए गांधी जी 09 अगस्त 1947 को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता पहुंच चुके थे. वो वहां मुस्लिम इलाके में शांति स्थापित करने के लिए काम कर रहे थे. भारी खून-खराबे को देखकर महात्मा गांधी ने अनशन शुरू कर दिया था. दिल्ली से स्वतंत्रता दिवस में शामिल होने का बुलावा भी था लेकिन गांधी ने आजादी के पहले समारोह में शिरकत न करने का फैसला किया. गांधी जी चाहते थे कि पहले बंगाल की हिंसा थम जाए. शांति स्थापित हो जाए तभी वो वहां से जाएंगे.
नेताओं ने लिखा पत्र
पहले स्वतंत्रता दिवस में शामिल होने के लिए महात्मा गांधी को कई नेताओं ने पत्र लिखा था. पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल ने एक संयुक्त पत्र लिखकर गांधी जी को आजादी के समारोह में शामिल होने का निवेदन किया था. पत्र के जवाब में महात्मा गांधी ने कहा था कि देश में शांति स्थापित करना ज्यादा जरूरी है.
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