Heatwave Alert in North India: उत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले 3 दिनों तक लू और भीषण लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है, लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे इसमें कमी आने की उम्मीद है, मौसम विभाग (IMD) ने रविवार को यह जानकारी दी.
पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है. इसके प्रभाव में, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 18 से 20 जून के दौरान गरज, बिजली और तेज हवाओं (30-40 किमी प्रति घंटा) के साथ हल्की से मध्यम बिखरी हुई बारिश होने की संभावना है.
मौसम विभाग ने बताया कि अगले पांच दिनों के दौरान मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़ में गरज, बिजली और तेज हवाओं (40-60 किमी प्रति घंटा) के साथ हल्की से मध्यम बिखरी हुई बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग ने यह भी बताया कि 17 और 18 जून को उत्तर प्रदेश के कई/अधिकांश हिस्सों में और 17 जून को पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली में लू से भीषण लू की स्थिति बनने की संभावना है.
17 जून को बिहार और झारखंड के कुछ हिस्सों में ऐसी स्थिति बन सकती है, लेकिन उसके बाद इन क्षेत्रों में गर्मी का प्रकोम कम होने की संभावना है. बता दें कि रविवार और सोमवार को बहुत अधिक तापमान के कारण पंजाब, हरियाणा, दिल्ली उत्तर प्रदेश के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है. रेड अलर्ट का मतलब है कि स्थानीय अधिकारियों को अत्यधिक गर्मी के कारण होने वाली आपदाओं और विषम परिस्थितियों को रोकने के लिए कार्यवाही करनी चाहिए.
मौसम विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, 11 जून से मानसून में लगभग कोई प्रगति नहीं हुई है. मानसून की उत्तरी सीमा अभी भी नवसारी, जलगांव, अमरावती, चंद्रपुर, बीजापुर, सुकमा, मलकांगिरी, विजयनगरम और इस्लामपुर से होकर गुजर रही है. अगले 4-5 दिनों में मानसून के कुछ और हिस्सों में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, गंगा के किनारे पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों, शेष उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ हिस्सों में पहुंचने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं. मानसून अब कुछ दिनों की देरी से चल रहा है. इसे 15 जून तक ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड के कुछ हिस्सों को कवर कर लेना चाहिए था.
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17 और 18 जून के दौरान जम्मू के क्षेत्र में, हिमाचल प्रदेश, उत्तरी राजस्थान के कुछ इलाकों में भीषण गर्मी की स्थिति बनने की संभावना है, वहीं 17 जून को उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल में ऐसी स्थिति बन सकती है, लेकिन बाद में इसमें कमी आने की संभावना है.
17 जून को पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में गर्म रातों का प्रकोप रहने की संभावना है. दिल्ली में 17 और 18 जून को गर्म रातें रह सकती हैं.
स्काईमेट वेदर के जलवायु और मौसम विज्ञान उपाध्यक्ष महेश पलावत ने कहा,'आने वाला पश्चिमी विक्षोभ दिल्ली और आसपास के इलाकों में अत्यधिक गर्मी से कुछ राहत दिला सकता है. 20 जून को दिल्ली में हल्की बारिश और पंजाब, हरियाणा में मध्यम बारिश की उम्मीद की जा सकती है. इसलिए, 23 जून तक गर्मी थोड़ी कम रह सकती है. उसके बाद पूर्वी हवाएं इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकती हैं और मानसून 27 जून के आसपास दिल्ली और आसपास के इलाकों में पहुंच सकता है.'
शनिवार को पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड, गंगा के पश्चिमी भागों वाले पश्चिम बंगाल, दक्षिण-पश्चिम बिहार; हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के कई हिस्सों में और कुछ हिस्सों में उत्तर राजस्थान और पूर्वी मध्य प्रदेश में लू और भीषण लू की स्थिति देखी गई. जम्मू-कश्मीर, पश्चिम मध्य प्रदेश और विदर्भ के कुछ इलाकों में लू का प्रकोप रहा. शनिवार को हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली के अधिकांश हिस्सों में गर्म रातों से लेकर भीषण गर्म रातों का प्रकोप रहा और पंजाब के कुछ हिस्सों में गर्म रातें रहीं. मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में भी गर्म रातें देखी गईं. शनिवार को हरियाणा-दिल्ली के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान 44-46 डिग्री सेल्सियस के दायरे में रहा; पंजाब, पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तर मध्य प्रदेश और झारखंड के कई हिस्सों में; उत्तर राजस्थान, पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में और उत्तरी ओडिशा और गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में भी ऐसा ही रहा. ये तापमान इन क्षेत्रों में सामान्य से 4-8 डिग्री सेल्सियस अधिक हैं. देश भर में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 46.3 डिग्री सेल्सियस कानपुर (पूर्वी उत्तर प्रदेश) में दर्ज किया गया.
लू तब घोषित की जाती है, जब मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक, तटीय इलाकों में 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक और पहाड़ी क्षेत्रों में 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो, और औसत अधिकतम तापमान से विचलन 4.5 से 6.4 डिग्री सेल्सियस अधिक हो. यदि ये स्थितियां लगातार दो दिनों तक बनी रहती हैं, तो दूसरे दिन लू घोषित कर दी जाती है. भीषण लू तब घोषित की जाती है, जब विचलन सामान्य से 6.4 डिग्री सेल्सियस अधिक हो.