Himachal Pradesh Landslide: कब थमेगा मानसून का कहर? हिमाचल में बारिश बनी आफत, भूस्खलन, बाढ़ और तबाही जैसे हालात

हिमाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश से हालात गंभीर हैं. मंडी में 2 लोगों की मौत और 2 के लापता होने की खबर है. राज्य में अब तक बारिश से जुड़ी घटनाओं में 164 लोगों की मौत हो चुकी है. सैकड़ों सड़कें बंद, बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित है.

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Km Jaya

Himachal Pradesh Landslide: हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है. राज्य के अधिकांश जिलों में भूस्खलन, जलभराव और सड़कों के अवरुद्ध होने की घटनाएं सामने आ रही हैं. मंडी जिले में सोमवार रात 11 बजे से शुरू हुई भारी बारिश ने हालात और भी गंभीर बना दिए. मंगलवार तड़के आई बाढ़ जैसी स्थिति में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लापता हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अधिकारियों ने बताया कि मंडी जिले के कई हिस्सों में भारी नुकसान हुआ है. अतिरिक्त उपायुक्त रोहित राठौर ने बताया कि सुबह करीब 4 बजे भारी बारिश के बाद ऊपरी इलाकों से बहकर आया मलबा निचले क्षेत्रों में जमा हो गया, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई. यह स्थिति बादल फटने का परिणाम भी हो सकती है. राठौर ने बताया कि राहत कार्य तेजी से जारी हैं, और प्रभावित इलाकों में टीमें तैनात कर दी गई हैं.

 

भूस्खलन की घटनाएं

सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में मंडी का क्षेत्रीय अस्पताल शामिल है, जहां अत्यधिक जलभराव है. अस्पताल की ओर जाने वाले मुख्य रास्ते बंद हो चुके हैं और नालियों का पानी ओवरफ्लो कर रहा है. शहर और उसके आसपास कई जगहों पर भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे सड़कों का संपर्क टूट गया है और लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

भूस्खलन के कारण हाईवे अवरुद्ध 

चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे भी मंडी और कुल्लू के बीच कई जगहों पर भूस्खलन के कारण अवरुद्ध हो गया है. सैकड़ों वाहन रास्ते में फंसे हैं और कई जगहों पर लंबा जाम लगा हुआ है. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, अब तक हिमाचल प्रदेश में 164 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें से 90 मौतें बारिश से जुड़ी घटनाओं जैसे भूस्खलन, बाढ़, डूबने, बादल फटने और बिजली गिरने से हुई हैं, जबकि 74 मौतें सड़क हादसों में हुई हैं.

मंडी में सबसे अधिक मौतें दर्ज

जिलेवार आंकड़ों में मंडी में सबसे अधिक 32 मौतें दर्ज की गई हैं, उसके बाद कांगड़ा और चंबा का स्थान है. मानसून सीजन के दौरान राज्य में 200 से अधिक सड़कें बंद हैं, बिजली ट्रांसफॉर्मर ठप हो चुके हैं और 110 से अधिक जलापूर्ति योजनाएं बाधित हुई हैं. राज्य में अब तक 1523 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ है.