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लोकसभा से राज्यसभा तक, सिमट रही BJP, घट रही NDA की ताकत, क्या है अगला प्लान?

लोकसभा से राज्यसभा तक BJP का संख्या बल कम हो गया है. इससे एनडीए की ताकत पर खासी प्रभाव पड़ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है सांसदों का रिटायर होना. 13 जुलाई को सांसद राकेश सिन्हा, राम सकल, सोनल मानसिंह और महेश जेठमलानी अपने पद से सेवामुक्त हुए हैं. हालांकि एक और सांसद हैं गुलाम अली, जो सितंबर 2028 को रिटायर होने जा रहे हैं. अभी राज्यसभा में 226 सांसद और 19 पद खाली है.

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लोकसभा से राज्यसभा तक, सिमट रही BJP, घट रही NDA की ताकत, क्या है अगला प्लान?
Courtesy: Social Media

BJP और सत्तारूढ़ गठबंधन नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस यानी एनडीए का संख्या बल राज्यसभा में कम हो गया है. इसकी सबसे बड़ी वजह है बीते शनिवार को 4 मनोनीत सदस्यों का रिटायर होना. फिलहाल एक ओर जहां भाजपा के राज्यसभा सदस्यों की संख्या 86 है. वहीं NDA 101 पर है. इधर कांग्रेस ऊपरी सदन में नेता प्रतिपक्ष का पद अपने हिस्से में करती भी दिख रही है.

दरअसल इस शनिवार यानी 13 जुलाई को रिटायर होने वाले सांसदों में राकेश सिन्हा, राम सकल, सोनल मानसिंह और महेश जेठमलानी का नाम शामिल है. खास बात यह है कि ये सभी मनोनीत सांसद बीजेपी के पक्ष में थे. हालांकि एक और सांसद हैं गुलाम अली, जो सितंबर 2028 को रिटायर होने जा रहे हैं. अभी राज्यसभा में 226 सांसद और 19 पद खाली है.

जल्दी सांसदों को सदन में जरूरी

जानकारी के मुताबिक मौजूदा स्थिति में भी एनडीए आगामी बजट सत्र में कई विधेयक पारित कर सकता है. इसकी वजह 7 गुटनिरपेक्ष मनोनीत, 2 निर्दलीय और AIADMK और YSRCP जैसे करीबी दलों का समर्थन है. खास बात है कि मनोनीत वर्ग में जल्दी सांसदों को सदन में लाना अन्य पर निर्भरता कम करने के लिहाज से एनडीए के लिए जरूरी होगा.

11 सीटों में से 10 पिछले महीने ही खाली

वहीं राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत करते हैं. फिलहाल 7 सांसद ऐसे हैं. जिन्होंने खुद को गुटनिरपेक्ष रखा है. इसके अलावा ऊपरी सदन में 19 पद खाली है. इनमें 4 मनोनीत, 4 जम्मू-कश्मीर है. इसके बाद असम, बिहार और महाराष्ट्र में 2-2, हरियाणा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान और त्रिपुरा में 1-1 है. इस लिहाज से उनकी संख्या 11 हो गई है. इन 11 सीटों में से 10 पिछले महीने ही खाली हुई है, क्योंकि कई सांसद लोकसभा में निर्वाचित हो चुके हैं.

ये सीटें NDA को मिल सकती है

आने वाले कुछ महीनों में इन 11 में से 8 सीटें संभावित रूप से एनडीए को मिल सकती है. जबकि 3 विपक्षी गठबंधन इंडिया के खाते में जा सकती है. इनमें एक सीट तेलंगाना से भी हो सकती है जो कांग्रेस के खाते में मिल सकती है. इसके बाद कांग्रेस का आंकड़ा 27 हो जाएगी.