menu-icon
India Daily

क्या होता है गेमिंग जोन, कौन से होते हैं फीचर्स, कैसे मिलती है इन्हें बनाने की मंजूरी?

गेमिंग जोन का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है. हर छोटे-बड़े शहरों में इसका विस्तार हो चुका है. खासकर के बच्चों को ये जगह काफी पसंद है.

India Daily Live
क्या होता है गेमिंग जोन, कौन से होते हैं फीचर्स, कैसे मिलती है इन्हें बनाने की मंजूरी?
Courtesy: Social Media

गुजरात के राजकोट में एक गेमिंग जोने में शनिवार को भीषण आग लग गई. हादसे में 12 बच्चों समेत 28 लोगों की मौत हो हई. कई लोगों को अंदर से सुरक्षित निकाला गया. बताया जा रहा है कि मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है. इस हादसे के बाद से कई लोगों के मन में ये सवाल उठ रहे हैं कि ये गेमिंग जोन क्या होता है. इसके अंदर क्या-क्या एक्टिविटी होती है. 

राजकोट शहर के कालावड रोड पर स्थित TRP गेमिंग जोन में आग लगने की घटना के बारे में जानकारी देते हुए कलेक्टर ने कहा कि शुरुआती जांच में आग लगने की वजह इलेक्ट्रिक कारण बताए जा रहे हैं. हालांकि आग कैसे लगी इसकी सही जानकारी नहीं है. गुजरात सरकार ने घटना की जांच के लिए एसआईटी के गठन की घोषणा की है. 

क्या होता है गेमिंग जोन?

गेमिंग जोन एक ऐसी जगह है जहां लोग गेम खेल सकते हैं. इसे गेम के लिए डिजाइन किया जाता है. भारत में गेमिंग जोन की लोकप्रियता बढ़ रही है. हर शहर में आपको गेमिंग जोन मिल जाएंगे. खासकर के बच्चे यहां जाना पसंद करते हैं. खिलाड़ियों को वीडियो गेम्स खेलने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया जाता है.  यह एक अलग क्षेत्र होता है जो विशेष गेमिंग उपकरणों से लैस होता है. गेमिंग जोन में खिलाड़ियों को अधिक तेज़ और अद्यतित गेमिंग अनुभव प्राप्त करने के लिए स्पेशल फीचर्स और गेमिंग उपकरणों की पहुंच मिलती है. 

कौन-कौन से गेम खेले जाते हैं? 

वीआर गेमिंग जोन 10 लाख से शुरू हो सकता है, जबकि आर्केड जोन के लिए लगभग 20-25 लाख सेटअप लागत की आवश्यकता होगी. एक गेमिंग जोन में कई तरह के गेम सेटअप किए जाते हैं. बाइक रेसिंग, आर्केड गेम्स, बॉलिंग, डांसिंग, इनडोर फुटबॉल और वॉलीबॉल, बास्केट बॉल, क्रिकेट, मिरर मेज, कार्ट रेसिंग, लाइव म्यूजिक शोज, जैसे गेम्स एक रूफ के नीचे होते हैं. 

कौन देता है मंजूरी? 

गेमिंग जोन बनाने के लिए कई तरह के मंजूरी लेनी पड़ती है. किसी भी इलाके में गेमिंग जोन बनाने के लिए सबसे पहले वहां की नगर पालिका की मंजूरी अनिवार्य है. इसके साथ ही फायर विभाग की ओर से NOC लेना होता है.