Vijay Floor Test: फ्लोर टेस्ट में थलपति की जीत, TVK को मिला 144 विधायकों का साथ; दो गुट में बंट गई AIADMK
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी.जोसेफ विजय ने आज सदन में विश्वासमत पाकर खुद को सुरक्षित कर लिया है. हालांकि TVK का विश्वासमत AIADMK के लिए नया खतरा पैदा कर दिया है.
थलपति विजय अभी के लिए सुरक्षित हो गए हैं. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद TVK प्रमुख सी. जोसेफ विजय को आज सदन में विश्वासमत मिल गया है. सदन में मौजूद 144 विधायकों ने विजय के समर्थन में वोट डाला, वहीं 22 विधायकों ने उनके खिलाफ मत डाला है. हालांकि 5 विधायकों ने कोई पक्ष नहीं रखा है.
DMK पार्टी नेता उदयनिधि स्टालिन ने आज यानी बुधवार सुबह ऐलान कर दिया था कि उनकी पार्टी इस फ्लोर टेस्ट में शामिल नहीं होगी. सदन में कुछ ऐसा हुआ भी कि डीएमके के 59 विधायक सदन से बाहर चले गए जिससे विजय की जीत की राह आसान हो गई.
दो गुट में बंटे AIADMK विधायक?
थलपति विजय के लिए भले ही विश्वास मत का मुद्दा खत्म हो गया हो, लेकिन AIADMK खेमे के अंदर फूट अब भी जारी है. पार्टी की ओर से अपने विधायकों को विजय के खिलाफ वोट देने का निर्देश दिया गया था, इसके बाद भी 24 विधायकों ने विजय के पक्ष में वोट डाले हैं. पार्टी के मुखिया एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने इसे आदेश की अवहेलना कहा है और उस खुलकर पार्टी के अंदर चल रही दरार के बारे में बात की है. इसी के साथ AIADMK के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
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AIADMK के वरिष्ठ और बागी नेता सीवी षणमुगम ने दावा किया था कि पलानीस्वामी DMK के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहती है जिसका पार्टी के कई नेताओं ने विरोध जताया है. उनका कहना था कि हम डीएमके से इसलिए अलग हुए थे क्योंकि हमारे विचार अलग थे अब एक होना संभव नहीं है. ऐसे में कुछ विधायकों ने टीवीके को समर्थन देने का फैसला लिया है. हालांकि बाद में उन्होंने सब ठीक बताया और कहा कि कुछ विधायक पुडुचेरी में इसलिए थे ताकी पार्टी को तोड़ा ना जा सके.
थलपति को फ्लोर टेस्ट में मिली विजय
विजय की पार्टी को विधानसभा चुनाव में 108 सीटों पर जीत मिली थी. हालांकि खुद विजय 2 सीटों से जीते थे इसिलए उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ी. अभी टीवीके के पास कुल 107 सीटें हैं. वहीं कांग्रेस ने 5 और दो वामपंथी पार्टियों के नेता समर्थन दिया जिसके बाद उन्होंने गठबंधन की सरकार बनाई. अब फ्लोर टेस्ट के दौरान भी विजय को 144 विधायकों का समर्थन मिल गया है.
बता दें कि भारतीय संविधान और विधानसभा के नियम के मुताबिक वोटिंग के दौरान जितने सदस्य सदन में होते हैं, सरकार बनाने के लिए उनमें से आधे+1 सदस्य का वोट चाहिए होता है. अगर यह आंकड़ा नहीं पहुंच पाता है तो मुख्यमंत्री को तुरंत इस्तीफा देना पड़ता है.