UPI Payment पर अब लगेगा एक्स्ट्रा चार्ज! ₹2000 से ज्यादा के पेमेंट पर SC ने नहीं लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR लगाने के फैसले पर रोक से इनकार कर दिया. कोर्ट ने केंद्र और अन्य पक्षों से चार सप्ताह में जवाब मांगा है.
2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा UPI पेमेंट पर लगने वाले Merchant Discount Rate यानी MDR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम आदेश दिया. कोर्ट ने केंद्र के फैसले पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया, हालांकि इस व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र, RBI और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने मामले को कानूनी से ज्यादा तकनीकी बताते हुए चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.
15 अक्टूबर से लागू होना है नया नियम
नए UPI फ्रेमवर्क के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ Person-to-Merchant यानी P2M लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा. यह शुल्क मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़ा है. सरकार के अनुसार, सामान्य P2M लेनदेन में भी कई श्रेणियों को इससे छूट मिलेगी.
सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से किया इनकार
MDR व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने केंद्र, RBI और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है. पीठ ने कहा कि मामला मुख्य रूप से तकनीकी प्रकृति का है. सभी संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है.
Also Read
P2P पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई MDR
सरकार ने साफ किया है कि Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले UPI भुगतान पर रकम की सीमा के आधार पर कोई MDR नहीं लगेगा. 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट और छोटे कारोबारियों के लिए तय जीरो-MDR व्यवस्था वाले लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे. सरकार के अनुसार, करीब 96 प्रतिशत P2M लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे.
ग्राहकों से फीस लेने पर रोक
सरकार के मुताबिक MDR ग्राहक से सीधे वसूली जाने वाली फीस नहीं है, बल्कि मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़ा शुल्क है. बैंकों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि मर्चेंट इसका बोझ ग्राहकों पर न डालें. UPI ऐप प्रोवाइडर्स को भी प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए चार्ज लगाने से रोका गया है. इस व्यवस्था पर अंतिम कानूनी स्थिति आगे की सुनवाई और जवाबों के बाद स्पष्ट होगी.