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India Daily

क्या बदल जाएगा टैक्स सिस्टम? बजट से पहले SBI चेयरमैन ने उठाया ये मुद्दा

बजट से पहले SBI के चेयरमैन सी.एस. शेट्टी ने मांग की है कि इक्विटी और बैंक डिपॉजिट पर एक जैसे टैक्स नियम लागू किए जाएं. उनका तर्क है कि बदलते इन्वेस्टमेंट ट्रेंड्स को देखते हुए, अब इक्विटी को अलग से टैक्स छूट की जरूरत नहीं है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
क्या बदल जाएगा टैक्स सिस्टम? बजट से पहले SBI चेयरमैन ने उठाया ये मुद्दा
Courtesy: @nsitharamanoffc x account

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज सुबह 11 बजे केंद्रीय बजट पेश करेंगी और आम आदमी से लेकर बड़े  बैंकर्स तक सभी को इससे काफी उम्मीदें हैं. हर कोई अपने-अपने लेवल पर राहत या किसी खास घोषणा की उम्मीद कर रहा है. इसी बीच शनिवार को देश के सबसे बड़े बैंक SBI के चेयरमैन सी.एस. सेट्टी ने भी एक मांग रखी. 

उन्होंने कहा कि शेयर बाजार में इन्वेस्टमेंट से होने वाले रिटर्न और बैंक डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स को लेकर एक जैसे नियम होने चाहिए. उनके बताया कि दुनिया के ज्यादातर देशों में ऐसी असमानता नहीं है, इसलिए भारत को भी इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए.

सी.एस. सेट्टी क्या है कहना?

सी.एस. सेट्टी का कहना है कि सभी तरह के फाइनेंशियल सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट्स के लिए एक समान माहौल होना चाहिए. यानी शेयरों में इन्वेस्टमेंट और बैंक डिपॉजिट से होने वाले रिटर्न पर टैक्स लगाने के लिए अलग-अलग नियम नहीं होने चाहिए.

एक बैंकिंग इवेंट के दौरान सेट्टी ने कहा कि उन्हें आने वाले बजट के प्रावधानों के बारे में जानकारी नहीं है और इस तरह के बदलाव से सरकार पर फिस्कल दबाव भी पड़ सकता है लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के किसी भी बड़े बाजार में इक्विटी इन्वेस्टमेंट के लिए कोई खास टैक्स ट्रीटमेंट नहीं दिया जाता है.

पहले से अब कैसे बदले हालात?

सेट्टी के मुताबिक अब हालात बदल गए हैं लेकिन एक समय था जब इक्विटी इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए आसान टैक्स नियम देना सही था. आज निवेशकों की दिलचस्पी जोखिम भरे शेयर बाजार में अपने आप बढ़ रही है, इसलिए शायद अब इक्विटी के लिए अलग से टैक्स छूट देने की जरूरत नहीं है.

अभी टैक्स में कितना है अंतर?

अभी बैंक डिपॉजिट से होने वाले रिटर्न पर टैक्स व्यक्ति के इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से लगता है, जो 30 प्रतिशत तक हो सकता है. दूसरी ओर, लिस्टेड इक्विटी पर टैक्स कम है. ₹1.25 लाख से ज्यादा लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर 12.5 प्रतिशत ​​टैक्स, शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन पर 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत टैक्स

बैंकर की क्या है मांग?

बैंकिंग सेक्टर लंबे समय से डिपॉजिट और इक्विटी इन्वेस्टमेंट के बीच टैक्सेशन में समानता की मांग कर रहा है. यह मांग हाल ही में तेज हुई है क्योंकि बैंकों को डिपॉजिट आकर्षित करने में दिक्कतें आ रही हैं.

निवेश स्टॉक मार्केट की ओर हो रहा है क्यों शिफ्ट?

कई बैंकरों का कहना है कि निवेशक ज्यादा समझदार हो गए हैं. वे अपने बैंक अकाउंट में सिर्फ़ मिनिमम बैलेंस रखते हैं और बाकी पैसा बेहतर रिटर्न के लिए स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करते हैं. इससे बैंकों के पास लोन देने के लिए उपलब्ध फंड कम हो जाता है. कम डिपॉजिट के कारण, बैंकों को कभी-कभी क्रेडिट डिमांड को पूरा करने के लिए सरकारी बॉन्ड में ज्यादा इन्वेस्ट करने या मनी मार्केट से उधार लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है.