Udaipur Kanhaiya Lal Murder Case: कन्हैयालाल हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता को हाईकोर्ट से मिली जमानत, अदालत ने रखी हैं ये शर्तें
Udaipur Kanhaiya Lal Murder Case: राजस्थान हाई कोर्ट ने उदयपुर के दर्जी कन्हैयालाल की हत्या के मुख्य साजिशकर्ता मोहम्मद जावेद को जमानत दे दी है. कोर्ट ने जमानत बांड और चल रही एनआईए जांच में सहयोग करने समेत अन्य शर्तें रखी हैं. इससे पहले सितंबर 2023 में एक अन्य आरोपी को जमानत दी गई थी.
Udaipur Kanhaiya Lal Murder Case: राजस्थान हाई कोर्ट ने गुरुवार को उदयपुर के कन्हैयालाल मर्डर केस के मुख्य साजिशकर्ता मोहम्मद जावेद को जमानत दे दी. मोहम्मद जावेद पर आरोप है कि उसने 28 जून, 2022 को उदयपुर के दर्जी कन्हैया लाल की हत्या में मुख्य साजिशकर्ता है. जस्टिस पंकज भंडारी और प्रवीर भटनागर की बेंच ने 2 लाख रुपये के जमानत बांड और 1 लाख रुपये की जमानत राशि जमा करने पर उसे रिहा करने का आदेश दिया. जमानत की शर्तें तय करते हुए पीठ ने उसे बिना अनुमति के भारत से बाहर यात्रा करने से रोक दिया और चल रही एनआईए जांच में सहयोग करने का आदेश दिया.
जावेद इस मामले में जमानत पाने वाला दूसरा आरोपी है. सितंबर 2023 में फरहाद मोहम्मद शेख उर्फ बबला को जयपुर की स्पेशल NIA कोर्ट ने जमानत दे दी थी. कन्हैयालाल की दुकान में ग्राहक बनकर घुसने और चाकू से उसकी हत्या करने वाले दो मुख्य आरोपी मोहम्मद रियाज अटारी और गौस मोहम्मद अजमेर जेल में बंद हैं.
सोशल मीडिया पोस्ट के लिए की गई थी कन्हैयालाल की हत्या
पैगंबर मोहम्मद पर की गई टिप्पणी को लेकर तत्कालीन भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाले एक सोशल मीडिया पोस्ट के लिए दर्जी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. हत्यारों ने इस जघन्य कृत्य का वीडियो बनाया और इसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया, जिसमें सिर कलम करने की बात कही गई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धमकी भी दी गई.
वारदात को अंजाम देने के बाद बाइक से भागते समय दोनों को राजस्थान पुलिस ने कुछ ही घंटों में गिरफ्तार कर लिया. जावेद को करीब एक महीने बाद एनआईए ने गिरफ्तार किया, जिसने 29 जून, 2022 को मामले को अपने हाथ में लिया और दिसंबर 2023 को दो पाकिस्तानी नागरिकों सहित 11 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. जावेद पर अन्य लोगों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रचने, रेकी करने और हत्या से पहले कन्हैया लाल की दुकान पर मौजूदगी की जानकारी अटारी और गौस को देने का आरोप लगाया गया था.
हत्या से पहले रेकी की दलील साबित करने में NIA विफल!
जावेद के वकील सैयद सआदत अली ने हाईकोर्ट की बेंच के समक्ष दलील दी कि एनआईए यह साबित करने में विफल रही है कि उसने हत्या से पहले रेकी की थी. फोन कॉल डिटेल रिकॉर्ड से पता चलता है कि जावेद को 28 जून, 2022 को सुबह 11 बजे एक अनसेव्ड नंबर से इनकमिंग कॉल आई थी, जबकि हत्या दोपहर 3:30 बजे हुई थी.
सआदत अली ने आगे कहा कि जावेद एक चूड़ी की दुकान में काम करता था और एनआईए ने मामले में उसकी भूमिका स्थापित करने के लिए कोई सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं कराया है. जांच एजेंसी ने दावा किया था कि जावेद और अन्य आरोपियों ने 27 जून, 2022 को एक चाय की दुकान पर हत्या की साजिश रची थी.
जयपुर स्थित एनआईए कोर्ट में 11 आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए गए, जिनमें 302 (हत्या), 452 (अतिक्रमण), 153-ए (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295-ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य, जिसका उद्देश्य किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करना हो), 120-बी (आपराधिक साजिश) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम शामिल हैं.