टॉप ब्रांड्स के दूध में 98 गुना अधिक मिला मल में पाया जाने वाला बैक्टीरिया! आपका दूध पीने के लिए कितना सुरक्षित

ट्रस्टीफाइड द्वारा की गई जांच में देश के टॉप ब्रांड्स के दूध में खतरनाक कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का लेवल भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की तय सीमा से 98 गुना अधिक पाया गया है.

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Sagar Bhardwaj

हम अपने बच्चों को नियमित तौर पर दूध पिलाते हैं. बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा हो इसके लिए हम उन्हें टॉप ब्रांड्स का दूध पिलाते हैं लेकिन तब क्या हो जब आपके उसी दूध में एक खतरनाक बैक्टीरिया मिला हो जिसे आप अपने बच्चे को पिला रहे हैं.  हाल ही में ट्रस्टीफाइड द्वारा की गई जांच में देश के टॉप ब्रांड्स के दूध में खतरनाक कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का लेवल भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की तय सीमा से 98 गुना अधिक पाया गया है. जबकि कुछ दूध के सैंपलों में टोटल प्लेट काउंट का लेवल सेफ लिमिट से बहुत अधिक मिला है.

क्या होता है कोलीफॉर्म बैक्टीरिया

कोलीफॉर्म बैक्टीरिया जीवाणुओं का एक बड़ा समूह है, यह वही बैक्टीरिया है जो आपके मल में पाया जाता है. यह बैक्टीरिया आपके शरीर में संक्रमण पैदा कर सकता है हालांकि अधिकतर मामलो में यह आपको नुकसान पहुंचाए बिना आपकी आंत में रह सकता है लेकिन क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार कुछ प्रकार के कोलीफॉर्म बैक्टीरिया दस्त, उल्टी और बुखार जैसी बीमारियां पैदा कर सकते हैं.

जांच पर क्या बोली मदर डेयरी

इस जांच रिपोर्ट देश के टॉप मिल्क ब्रांड मदर डेयरी ने सिरे से खारिज कर दिया. कंपनी के एक अधिकारी ने कहा कि वीडियो में चुनिंदा रुप से डेटा की व्याख्या की गई है और उन महत्वपूर्ण तकनीकी मापदंडों को नजरअंदाज किया गया है जो सीधे माइक्रोबायोलॉजिकल परिणामों को प्रभावित करते हैं. उन्होंने कहा कि तापमान में मामूली बदलाव भी कुल प्लेट काउंट की रिडिंग को प्रभावित कर सकता है. रिपोर्ट में तापमान प्रबंधन में गड़बड़ी दिखाई गई है जिसमें किट का तापमान 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है जो सैंपल की गुणवत्ता में कमी का स्पष्ट संकेत है.

क्या होता है पाश्चुरीकृत दूध

पैकेट वाले दूध पाश्चुरीकृत दूध होते हैं. यह वह दूध होता है जिसे एक विशिष्ट तापमान तक गर्म किया जाता है ताकि उसमें से हानिकारक बैक्टीरिया निकल जाएं या नष्ट हो जाएं. इसके बाद यह पीने के लिए अधिक समय तक सुरक्षित हो जाता है. हालांकि पाश्चुरीकृत दूध को हमेशा उबालकर पीने की सलाह दी जाती है.