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India Daily

अपनों ने ही किया अभिषेक बनर्जी के साथ 'खेला'? क्या है 'सिग्नेचर स्कैम' जिससे TMC में हुई बगावत

पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह बढ़ गई है. शोभनदेब चटर्जी को विपक्ष का नेता बनाने के प्रस्ताव पर विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर के आरोप के बाद सीआईडी ने जांच शुरू कर दी है.

KanhaiyaaZee
अपनों ने ही किया अभिषेक बनर्जी के साथ 'खेला'? क्या है 'सिग्नेचर स्कैम' जिससे TMC में हुई बगावत
Courtesy: Social Media

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर की रार अब खुलकर सड़कों पर आ गई है. पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी उस समय एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गई, जब विपक्ष के नेता पद के नामांकन पत्र में विधायकों के जाली दस्तखत होने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ. इस कथित 'सिग्नेचर घोटाले' ने तृणमूल लीडरशिप की साख को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे पूरी पार्टी रक्षात्मक मुद्रा में आ गई है.

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब शोभनदेब चटर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाने के लिए एक समर्थन पत्र तैयार किया गया. इसके लिए पार्टी को कम से कम 70 विधायकों के हस्ताक्षरों की जरूरत थी. जैसे ही यह सूची सामने आई, कई विधायकों ने बगावती तेवर अपनाते हुए दावा किया कि उन्होंने इस पत्र पर कभी दस्तखत किए ही नहीं थे. चुनावी नतीजों के बाद हुई बैठक में यह जिम्मेदारी ममता बनर्जी को दी गई थी.

अपनों ने ही उठाए नेतृत्व पर सवाल

पार्टी के भीतर असंतोष तब और बढ़ गया जब रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा जैसे विधायकों ने सीधे शीर्ष नेतृत्व पर उंगली उठा दी. निष्कासित नेता संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने ही इस त्रुटिपूर्ण सूची को प्रमाणित किया था, इसलिए इस लापरवाही की सीधी जिम्मेदारी उनकी बनती है. वहीं, विधायक बहारुल इस्लाम ने भी माना कि बैठक में गैरहाजिर होने के बावजूद सूची में उनका नाम शामिल था.

सीआईडी की विशेष एसआईटी गठित

मामले की गंभीरता को देखते हुए पश्चिम बंगाल आपराधिक जांच विभाग (CID) ने इस कथित जालसाजी की जांच के लिए पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. एक पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) के नेतृत्व में यह उच्च स्तरीय टीम विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल कर रही है. सीआईडी की टीमें अब संबंधित विधायकों के घरों पर जाकर हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स की मदद से उनके असली हस्ताक्षरों का मिलान कर रही हैं.

बागी नेताओं पर पार्टी की गाज

इस अंदरूनी कलह को दबाने के लिए तृणमूल कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाते हुए रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया है. पार्टी उपाध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने एक बयान जारी कर कहा कि ये विधायक लगातार बैठकों से गायब रहकर अनुशासनहीनता कर रहे थे. दूसरी तरफ, सीआईडी ने पूछताछ के लिए अभिषेक बनर्जी को समन भेजा था, लेकिन वे जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए.

भाजपा और ममता में वार-पलटवार

इस विवाद को लेकर सूबे की सियासत भी पूरी तरह गरमा गई है. विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी पर अपने ही विधायकों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है. इस पर पलटवार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों के दम पर तृणमूल की एकजुटता को तोड़ने की साजिश रच रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके विधायकों को डरा-धमकाकर बैठकों में आने से रोका जा रहा है.