तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी टीवीके के नेता विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश किया. बहुमत के आंकड़े को लेकर अब सवाल खड़े हो गए हैं. सूत्रों के मुताबिक विजय के पास फिलहाल जरूरी समर्थन नहीं है. इसी वजह से शनिवार को होने वाले संभावित शपथ ग्रहण पर भी अनिश्चितता बन गई है.
शुक्रवार शाम विजय ने आर. वी. आर्लेकर से मुलाकात की थी. इस मुलाकात को लेकर पूरे राज्य में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई थी. बताया गया कि विजय ने राज्यपाल को समर्थन देने वाले विधायकों की सूची सौंपी और सरकार बनाने का दावा पेश किया. हालांकि, बाद में सामने आई जानकारी ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए. सूत्रों के अनुसार विजय ने 116 विधायकों के समर्थन का दावा किया, जबकि विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है.
Ok, it’s not over yet.
— Shiv Aroor (@ShivAroor) May 8, 2026Also Read
राजभवन सूत्रों के मुताबिक जिन विधायकों के समर्थन पत्र विजय की ओर से पेश किए गए, उनमें कुछ अहम सहयोगी दलों के पत्र शामिल नहीं थे. बताया जा रहा है कि वीसीके और आईयूएमएल जैसे दलों के समर्थन पत्र राज्यपाल को नहीं सौंपे गए. इन दोनों दलों के पास दो-दो विधायक हैं और उनका समर्थन बहुमत के समीकरण में अहम माना जा रहा है.
राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि विजय शनिवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. यह भी कहा जा रहा था कि उन्होंने राज्यपाल से जल्द शपथ ग्रहण कराने का अनुरोध किया था. अब राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने साफ कर दिया है कि फिलहाल विजय को सरकार बनाने के लिए औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया गया है. इसके बाद शपथ ग्रहण को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर विराम लग गया.
तमिलनाडु में अब सभी की नजरें अगले राजनीतिक कदम पर टिक गई हैं. विजय की पार्टी के नेता लगातार दावा कर रहे हैं कि उन्हें जरूरी समर्थन मिल जाएगा. वहीं विपक्ष इस स्थिति को अस्थिर बहुमत बता रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ घंटे बेहद अहम साबित हो सकते हैं.