'3 से 6 महीने में गिर सकती है सरकार', तमिलनाडु की विजय सरकार पर स्टालिन का बड़ा दावा

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने दावा किया कि गठबंधन के सहारे चल रही यह सरकार अगले तीन से छह महीनों के भीतर गिर सकती है.

ANI
Shanu Sharma

तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. द्रविड़ मुनेत्र कषगम के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कषगम सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि मौजूदा सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी. 

स्टालिन ने कहा कि यह सरकार पूर्ण बहुमत के बजाय सहयोगी दलों के समर्थन पर टिकी हुई है और अगले तीन से छह महीनों के भीतर राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं. स्टालिन ने कहा कि टीवीके को विधानसभा चुनाव में 108 सीटें मिलीं, जबकि सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की आवश्यकता थी. उनके अनुसार, यह स्पष्ट संकेत है कि जनता ने टीवीके को अपने दम पर सरकार चलाने का जनादेश नहीं दिया.

जनादेश नहीं, गठबंधन के सहारे बनी सरकार

स्टालिन ने कहा कि सरकार उन दलों के समर्थन से चल रही है, जो हाल तक डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थे. उन्होंने इसे अस्थिर राजनीतिक व्यवस्था बताते हुए कहा कि कब यह गठबंधन बिखर जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है. डीएमके प्रमुख ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अभी से चुनावी तैयारियों में जुटने का आह्वान किया.


उन्होंने कहा कि किसी भी समय विधानसभा चुनाव की घोषणा हो सकती है और पार्टी को उसके लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि चुनाव की घोषणा होने का इंतजार करने के बजाय संगठन को अभी से बूथ स्तर तक सक्रिय होना होगा. स्टालिन ने कार्यकर्ताओं से डीएमके की सत्ता में वापसी के लिए जमीनी स्तर पर अभियान शुरू करने का आह्वान किया.

विजय की पार्टी ने पहली बार में रचा इतिहास

तमिलगा वेट्री कषगम ने अपने गठन के बाद पहला विधानसभा चुनाव लड़ते हुए 108 सीटों पर जीत दर्ज कर तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव किया. अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय के नेतृत्व में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और डीएमके तथा एआईएडीएमके के लंबे राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती दी. हालांकि स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण पार्टी को सरकार बनाने के लिए अन्य दलों का समर्थन लेना पड़ा. विधानसभा चुनाव में टीवीके ने 108 सीटें जीतीं, जबकि डीएमके को 59 और एआईएडीएमके को 47 सीटें मिलीं. कांग्रेस और अन्य दलों के खाते में 20 सीटें गईं.