नई दिल्ली: दक्षिण भारत की राजनीति में इस समय एक नया और बड़ा वैचारिक विवाद खड़ा हो गया है. तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने हाल ही में मुल्लिवैक्काल स्मृति दिवस के मौके पर एक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की. इस पोस्ट के बाद देश की सियासत गरमा गई है. भारतीय जनता पार्टी ने इसे सीधे तौर पर प्रतिबंधित संगठन एलटीटीई (LTTE) के पूर्व प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरन को श्रद्धांजलि देने से जोड़कर मुख्यमंत्री विजय और उनके गठबंधन सहयोगियों पर चौतरफा हमला बोल दिया है.
इस पूरे राजनीतिक विवाद पर मुख्यमंत्री की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने सूत्रों के हवाले से अपनी स्थिति स्पष्ट की है. पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री विजय का इरादा किसी खास अलगाववादी नेता को महिमामंडित करना नहीं था. उन्होंने श्रीलंकाई गृहयुद्ध के दौरान मुल्लिवैक्काल में मारे गए हजारों निर्दोष तमिल लोगों के दर्द और उस भयानक नरसंहार को याद किया था. एक संवेदनशील और जनप्रिय राजनेता होने के नाते मासूमों को श्रद्धांजलि देना उनका नैतिक कर्तव्य है.
जैसे ही मुख्यमंत्री विजय की यह पोस्ट सामने आई, भाजपा ने इसे एक बड़ा मुद्दा बना लिया. भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर और आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इसके बहाने सीधे कांग्रेस नेता राहुल गांधी को निशाने पर लिया. मालवीय ने तंज कसते हुए लिखा कि जिस संगठन ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की बेरहमी से हत्या की थी, उसके प्रमुख को तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री याद कर रहे हैं. सत्ता सुख के लिए कांग्रेस इस पर भी पूरी तरह खामोश बैठी है.
दरअसल, 18 मई को पूरी दुनिया में फैले तमिल समुदाय के लोग 'मुल्लिवैक्काल स्मृति दिवस' के रूप में मनाते हैं. श्रीलंका की आजादी के बाद सिंहली बहुसंख्यकों और तमिल अल्पसंख्यकों के बीच एक लंबा गृहयुद्ध चला था. इस भीषण संघर्ष का अंत 18 मई 2009 को मुल्लिवैक्काल नामक एक तटीय गांव में एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरन की मौत के साथ हुआ था. इस युद्ध के अंतिम दिनों में हजारों की संख्या में निर्दोष तमिल नागरिक भी मारे गए थे.
श्रीलंका में रहने वाले तमिल मूल रूप से भारत से ही वहां जाकर बसे थे, जिसके कारण दोनों देशों के तमिलों के बीच एक गहरा और मजबूत भावनात्मक रिश्ता रहा है. तमिलनाडु की क्षेत्रीय पार्टियां जैसे द्रमुक और अब विजय की टीवीके, हमेशा से इन तमिलों के अधिकारों के लिए मुखर रही हैं. यह पहली बार नहीं है जब विजय ने श्रीलंका के तमिलों का मुद्दा उठाया हो, इससे पहले भी वह नागपट्टिनम की एक जनसभा में उनके हक में आवाज बुलंद कर चुके हैं.