'ढुलमुल रवैया अपना रही है उत्तराखंड सरकार', जंगल की आग मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई जबरदस्त फटकार

SC Pulls Up Uttarakhand Govt: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तराखंड सरकार के जंगल की आग से निपटने के तरीके पर नाराजगी व्यक्त की और राज्य के दृष्टिकोण को "असुविधाजनक" बताया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही इससे निपटने के लिए काम करने की योजनाएं तैयार कर उन्हें आखिरी रूप दे दिया गया है लेकिन उनको लागू करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया.

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SC Pulls Up Uttarakhand Govt: उत्तराखंड में जंगल की आग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सख्त नाराजगी जताई है. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की जंगल की आग को रोकने में कार्यप्रणाली " ढीली" (lackadaisical) रही है.

जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड सरकार ने जंगल की आग से निपटने के लिए कार्य योजना तो बनाई, लेकिन उसे लागू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए. इतना ही नहीं, जंगल विभाग में भारी पदों की कमी को भी सुप्रीम कोर्ट ने चिंताजनक बताया और इस पर भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए.

उत्तराखंड के मुख्य सचिव को दिया पेश होने का आदेश

न्यायमूर्ति बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने जंगल की आग पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड के मुख्य सचिव को 17 मई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया है. पीठ में शामिल जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस संदीप मेहता ने भी राज्य के वन विभाग में भारी पदों की कमी पर चिंता जताई.

गौरतलब है कि धुमकोट क्षेत्र में लगी आग उत्तराखंड में नवंबर 2023 से अब तक हुई कुल 998 जंगल की आग की घटनाओं में से नवीनतम है. सिर्फ 6 और 7 मई के बीच ही 68 आग की घटनाएं दर्ज की गईं. पिछले सीजन में राज्य में 773 ऐसी घटनाएं सामने आई थीं. अब तक आग से 1196 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित हो चुकी है. जंगली जानवरों के रिहायशी इलाकों में आने की खबरें भी आई हैं और इन आगों में अब तक चार लोगों की जान भी जा चुकी है. पौड़ी की कभी हरी-भरी पहाड़ियां अब जली हुई, काली पड़ी हैं.

लोगों की हेल्थ पर पड़ रहा गहरा असर

धुएं की वजह से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो रही हैं, यहां तक कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है. लोगों में घबराहट और डिप्रेशन जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं. खासकर बच्चों और बुजुर्गों को आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ की समस्याएं हो रही हैं. नैनीताल की रहने वाली निता पवार का कहना है कि "चंपावत से सांस लेने में तकलीफ की वजह से लोगों को दिल्ली रेफर किए जाने के मामले भी सामने आए हैं."

अधिकारियों का कहना है कि उत्तराखंड में जंगल की आग की घटनाओं के लिए ज्यादातर मानवीय गतिविधियां जिम्मेदार हैं. स्थानीय लोग कभी-कभी खेती या पशुओं के चरने के लिए जमीन साफ करने के लिए घास के मैदानों में आग लगा देते हैं, जिससे अनजाने में बड़ी आग लग जाती है. इसके अलावा, मानसून से पहले के इस मौसम में कम बारिश के कारण मिट्टी में नमी की कमी और जंगल में सूखे पत्तों, चीड़ की सुइयों और अन्य ज्वलनशील पदार्थों की मौजूदगी भी ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देती है.

जंगल की आग ने पर्यटन गतिविधियों को भी प्रभावित किया है. कई समूह जो कुमाऊं क्षेत्र में ट्रैकिंग और पर्वतारोहण यात्राओं की योजना बना रहे थे, उन्हें अब रद्द करना पड़ सकता है.