'कांवड़ रूट पर ठेले और ढाबों पर नहीं लिखना होगा नाम,' सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया राज्य सरकारों का आदेश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया था कि कांवड़ यात्रा के रूट पर पड़ने वाली सभी खाने-पीने की दुकानों को नेम प्लेट लगाना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को पलट दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है दुकान मालिकों को नेम प्लेट लगाने की जरूरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार को नोटिस भी जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने 26 जुलाई 2024 तक, जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि खाना बेचने वालों को, फूड सेलर्स को उनका नाम बताने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें राज्य सरकार ने कहा था कि कांवड़ रूट पर पड़ने वाली दुकानों पर नेम प्लेट लगाना अनिवार्य होगा. राज्य सरकारों की ओर से आदेश जारी हुआ था कि खाने-पीने वाली दुकानों पर नाम लिखना अनिवार्य होगा. सुप्रीम कोर्ट ने अभी राज्यों के इस फैसले पर रोक लगा दी है. बेंच ने यह भी कहा है कि दुकानदारों को यह जरूर बताना चाहिए कि वे किस तरह के खाने बनाते हैं. सुप्रम कोर्ट ने योगी सरकार के आदेश पर भी रोक लगा दी, जिसमें कहा गया था कि कांवड़ रूट पर पड़ने वाली हर खाने-पीने की दुकानों को नाम बताना होगा. सीएम योगी के इस आदेश पर जमकर सियासत भी हुई थी. उनके अपने सहयोगी दलों के नेताओं ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी.
राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चौधरी ने सवाल उठाते हुए कहा था कि यह फैसला गलत है, क्या अब कपड़ों पर नाम लिखकर चलें. कावड़ यात्रा में सेवा करने वाले, कभी लोगों का नाम नहीं पूछते. वहीं दूसरी तरफ, जनता दल यूनाइटेड के नेताओं ने कहा था कि योगी सरकार को इस फैसले पर विचार करना चाहिए. मुख्तार अब्बास नकवी ने भी इस फैसले को ठीक नहीं कहा था.
'आदेश को याचिकाकर्ता ने कहा विभाजनकारी'
याचिकाकर्ताओं ने तीनों राज्य सरकारों के इस फैसले को चुनौती दी थी. याचिका में कहा गया था कि सरकारों को ऐसे विभाजनकारी आदेश नहीं देना चाहिए. यह धार्मिक भेदभाव है. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस ऋषिकेश रॉय और एसवीएन भट्टी की बेंच ने केस की सुनवाई की. कोर्ट ने एक अंतरिम स्टे आर्डर जारी किया है, जिसमें इस फैसले पर रोक लगा दी है.
कहां से जारी हुआ था पहला आदेश?
सबसे पहले ये आदेश, मुजफ्फरनगर पुलिस ने जारी किया था. इसके खिलाफ तभी कई याचिकाएं दायर हुईं. प्रोफेसर अपूर्वानंदर ने इस आदेश के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी. कोर्ट ने कहा कि कांवड़ियों को उनकी पसंद का खाना मिलना चाहिए और साफ-सफाई का ध्यान रखा जाना चाहिए. सीनियर वकील अभिषक मनु सिंघवी, याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए थे. उन्होंने कहा कि इस फैसले के पीछे क्या तार्किकता है. एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह स्थिति चिंताजनक है. पुलिस अधिकारी ऐसे आदेश देते हैं, जिनका नतीजा विभाजनकारी हो सकता है.
'दुकानदारों की होगी पहचान, दूसरे राज्यों में दिखेगा असर'
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ऐसे आदेश, दुकान मालिकों की पहचान करा देंगे और उनका आर्थिक बहिष्कार हो सकता है. उन्होंने तर्क दिया कि इसका असर दूसरे राज्यों में भी देखने को मिल सकता है. बेंच ने सवाल किया है कि क्या इसका लिखित आदेश जारी हुआ है. अभिषेक मनु सिंघवी ने सफाई दी कि इसे प्रेस स्टेटमेंट के जरिए जारी किया गया था. अधिकारी इसे कड़ाई से लागू करा रहे थे.
'किस संवैधानिक प्रावधान के तहत हुआ है ऐसा'
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'ऐसा कभी नहीं हुआ था. इसके पीछे कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है. कोई कानून पुलिस कमिश्नर ने नहीं बताया, जिससे उन्हें ये करने की ताकत मिलती हो. यह आदेश हर हाथगाड़ी, चाय की दुकान, कर्मचारियों के लिए जारी हुआ, यह किसी मकसद का नहीं था.'
कोर्ट ने पूछा, कहां जारी हुआ है ऐसा आदेश?
जस्टिस रॉय ने सवाल किया कि अगर कोई औपचारिक आदेश जारी हुआ है तो बताएं. अभिषेक सिंघवी ने कहा कि यह एक छिपा हुआ आदेश है. जस्टिस रॉय ने कहा कि ऐसे आदेश, स्वैच्छिक हो सकते हैं. सिंघवी ने कहा कि ऐसे लोग बेहद चतुर होते हैं, जो नियम तोड़ते हैं. जस्टिस भट्टी ने कहा कि इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि सेफ्टी, स्टैंडर्ड और सेक्युलरिज्म पर ही इसकी सुनवाई हो सकती है. कांवड़ यात्रा दशकों से होती रही है.
कांवड़ यात्रा में कावंड़ियों की हर धर्म के लोग करते हैं सेवा
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'हर धर्म के लोग, मुस्लिम, क्रिश्चियन, बुद्धिस्ट भी कावंड़ियों की मदद करते हैं.' जहां तक मांसाहार और शाकाहार की बात है, कई रेस्त्रां ऐसे हैं, जहां शाकाहारी खाना मिलता है. क्या मुझे वहां नहीं जाना चाहिए, इसलिए केवल कि वहां मुस्लिम कर्मचारी हैं.
जब जस्टिस ने सुनाया होटल वाला किस्सा
जस्टिस भट्टी ने एक कहानी का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि केरल में एक होटल है जिसे हिंदू चलाते हैं. दूसरा मुस्लिम चलाता है. वे अक्सर, उस होटल में चलाते हैं, जिसका मालिक मुसलमान है लेकिन शाकाहारी खाना बनवाता है. वहां साफ-सफाई के अतंरराष्ट्रीय मानकों का पालन होगा.
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ऐसी रिपोर्ट हैं कि स्थानीय निकाय के आदेश का उल्लंघन होने पर 2000 से 5000 रुपये तक फाइन लगाया जाएगा. कई अल्पसंख्यक समुदाय के लोग नौकरी खो देंगे. कानून ये है कि केवल कैलोरी का विवरण दिया जाए.