ज्ञानवापी, मथुरा और संभल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की खास पहल, स्पेशल लोक अदालत में निकलेगा समाधान
सुप्रीम कोर्ट ने देश के तीन सबसे चर्चित धार्मिक विवादों के समाधान के लिए एक अहम कदम उठाया है. अदालत ने ज्ञानवापी, श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल विवाद को विशेष अदालत में भेज दिया है. आइए जानते हैं ऐसा क्यों किया गया है?
सुप्रीम कोर्ट ने देश के सबसे संवेदनशील धार्मिक मामलों को सुलझाने के लिए अहम कदम उठाते हुए, इन मामलों को अदालत के बाहर सुलह कराने का प्रयास किया है.
अदालत की ओर से ज्ञानवापी मस्जिद विवाद, मथुरा के श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद और संभल के हरिहर मंदिर-शाही जामा मस्जिद विवाद को लोक अदालत भेजने का फैसला किया गया है.
क्या है लोक अदालत लगाने के पीछे का उद्देश्य?
लोक अदालत पहल का उद्देश्य वर्षों से लंबित कानूनी विवादों का समाधान आपसी संवाद और सहमति के आधार पर तलाशना है, ताकि लंबी कानू प्रक्रिया से बचा जा सके. लोक अदालत का आयोजन 21 से 23 अगस्त के बीच कोर्ट परिसर के अंदर ही किया जाएगा. इस समारोह में शामिल होने के लिए तीनों मामलों से जुड़े दोनों पक्षों को नोटिस जारी किया गया है.
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क्या लोक अदालत के कारण तय तारीख होंगे प्रभावित?
सुप्रीम कोर्ट से इस पहल की जानकारी देते हुए यह साफ बताया गया कि लोक अदालत लगने से पहले भी सुलह की प्रक्रिया जारी रहेगी. पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक 14 जुलाई को वाराणसी में ज्ञानवापी मामले में सुलह से पहले की सुनवाई होगी. इससे पहले 5 जुलाई को मथुरा विवाद पर मध्यस्थता करने की कोशिश की गई थी, लेकिन सफल नहीं हो पाई थी. जिसके बाद लोक अदालत में सुलझाने की कोशिश की जाएगी.
क्या है ज्ञानवापी, कृष्ण जन्मभूमि और संभल विवाद?
ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष का दावा है कि यहां पहले काशी विश्वनाथ मंदिर था, जिसे मुगल काल में ध्वस्त कर मस्जिद बनाई गई थी. हालांकि अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी इन दावों का विरोध करती है.
मथुरा के श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में हिंदू पक्ष का दावा है कि भगवान श्री कृष्ण के जन्मस्थान पर बने मंदिर को औरंगजेब के शासनकाल में हटाकर मस्जिद बनाई गई थी. वहीं शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी इन दावों को खारिज करते हुए विभिन्न कानूनी आधारों का हवाला दे रही है.
संभल में विवाद उस समय चर्चा में आया जब एक सिविल अदालत ने शाही जामा मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया. याचिका में दावा किया गया था कि वहां पहले हरिहर मंदिर था. तीनों विवाद फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं.