'जब लोग आपको रिजेक्ट करते हैं तो...', सुप्रीम कोर्ट ने बिहार चुनाव याचिका पर प्रशांत किशोर की पार्टी को फटकारा
सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज पार्टी द्वारा बिहार चुनाव रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने चुनाव हारने के बाद याचिका दायर करने पर कड़ी टिप्पणी की और पार्टी को पटना हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें चुनाव से पहले मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट यानी MCC के कथित उल्लंघन के कारण 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग की गई थी.
याचिका में तर्क दिया गया था कि चुनाव, जिसमें जन सुराज ने चुनावी शुरुआत की और जिन 238 सीटों पर चुनाव लड़ा, उनमें से एक भी सीट जीतने में नाकाम रही, उसे रद्द घोषित किया जाना चाहिए. पार्टी ने जनता दल और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन पर MCC के उल्लंघन का आरोप लगाया.
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में विशेष रूप से बिहार में महिला मतदाताओं को ₹10,000 के ट्रांसफर को चुनौती दी गई थी, जब मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू था.
याचिका पर CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने चुनाव हारने के बाद ध्यान आकर्षित करने के लिए अदालत का इस्तेमाल करने की कोशिश करने पर पार्टी को फटकारा. इसने याचिकाकर्ता से पटना उच्च न्यायालय जाने को कहा क्योंकि यह मुद्दा केवल एक राज्य से संबंधित था.
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'आपको कितने वोट मिले? जब लोग आपको रिजेक्ट कर देते हैं, तो आप राहत पाने के लिए न्यायिक मंच का इस्तेमाल करते हैं! किसी को तो उस योजना को ही चुनौती देनी चाहिए थी. वह हमारे सामने प्रार्थना नहीं है. आप बस पूरे राज्य के चुनाव को रद्द घोषित करने के लिए एक व्यापक निर्देश चाहते हैं.'
पटना हाई कोर्ट जाने का क्यों दिया निर्देश?
पीठ ने कहा कि यह याचिका प्रभावी रूप से पूरे राज्य को कवर करने वाली एक संयुक्त चुनाव याचिका थी. 'चूंकि यह केवल एक राज्य से संबंधित है, कृपया उस उच्च न्यायालय में जाएं. बेंच ने कहा, 'कुछ मामलों में, मुफ्त चीजो का एक गंभीर मुद्दा है जिसकी हम गंभीरता से जांच करेंगे.'
पार्टी ने अपनी याचिका में क्या कहा?
जन स्वराज की ओर से पेश हुए सीनियर वकील सीयू सिंह ने कहा कि जिस योजना के तहत वोटर्स को पेमेंट किया गया था, उसे चुनावों से ठीक पहले घोषित किया गया था. उन्होंने आगे कहा कि जब मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट लागू था, तब पैसे बांटे गए थे.
लेकिन जब किसी राज्य में गंभीर वित्तीय घाटा हो और यह एक तरह की खैरात हो, क्योंकि 10,000 रुपये तुरंत दिए जाएंगे और MCC की घोषणा के तुरंत बाद 35 लाख से ज्यादा लोग इस योजना में शामिल हो गए.' बेंच ने कहा, 'डायरेक्ट ट्रांसफर योजनाएं अलग होती हैं. यह महिलाओं के सेल्फ हेल्प ग्रुप के बारे में है.'