त्रिपुरा में जलकर खाक हुआ नशे का 'काला साम्राज्य', वीडियो में देखें कैसे 13.5 करोड़ का गांजा राख में हुआ तब्दील
त्रिपुरा पुलिस और TSR की संयुक्त टीम ने सिपाहीजाला जिले में 13.5 करोड़ रुपये मूल्य की अवैध गांजा खेती को पूरी तरह नष्ट कर दिया है. 32 एकड़ में फैले 90,000 पौधों को जलाकर राख कर दिया गया.
नई दिल्ली: त्रिपुरा में नशीले पदार्थों के खिलाफ जंग और तेज हो गई है. गुरुवार को सोनामुरा पुलिस और त्रिपुरा स्टेट राइफल्स ने एक बड़े संयुक्त ऑपरेशन में करोड़ों की अवैध गांजा खेती तहस-नहस कर दी. सिपाहीजाला जिले के सीमावर्ती जंगलों में चला यह अभियान सुबह से शाम तक चलता रहा. सुरक्षा बलों ने उन दुर्गम इलाकों को निशाना बनाया, जिन्हें तस्करों ने अपना सुरक्षित ठिकाना बनाया था. इस बड़ी कार्रवाई से नशा माफियाओं को भारी आर्थिक चोट पहुंची है, जिससे उनके पूरे नेटवर्क में खलबली मच गई है.
सोनामुरा पुलिस के नेतृत्व में यह दिनभर चलने वाला विशेष अभियान मैनामा, अरोलिया और पोवारमुरा जैसे दुर्गम वन क्षेत्रों पर केंद्रित रहा. पुलिस ने इन दुर्गम इलाकों की पहचान अवैध गांजा उत्पादन के मुख्य केंद्रों के रूप में पहले ही कर ली थी. सुरक्षा बलों की कई संयुक्त टुकड़ियों ने सुबह 9 बजे से ही पूरे क्षेत्र की घेराबंदी शुरू कर दी थी. टीम ने जंगलों के भीतर छिपे उन बड़े भूखंडों को खोज निकाला, जहां तस्करों ने बड़ी सावधानी से गांजे की अवैध फसल उगाई थी.
करोड़ों की फसल हुई खाक
पुलिस की सघन जांच के अनुसार यह अवैध खेती लगभग 32 एकड़ सरकारी वन भूमि पर फैली हुई थी. इस पूरी जमीन को लगभग 25 अलग-अलग छोटे-बड़े भूखंडों में विभाजित किया गया था ताकि यह आसानी से किसी की नजर में न आ सके. इस बड़े ऑपरेशन के दौरान जवानों ने लगभग 90,000 तैयार गांजा पौधों को जड़ से उखाड़कर फेंक दिया. अंतरराष्ट्रीय काले बाजार में इन पौधों और नष्ट किए गए माल की अनुमानित कीमत करीब 13 करोड़ 5 लाख रुपये बताई गई है.
मौके पर जलाए गए नशीले पदार्थ
पुलिस ने न केवल खेतों में लगे पौधों को नष्ट किया, बल्कि वहां बोरियों में भरकर रखे गए भारी मात्रा में कच्चे माल को भी बरामद किया. तलाशी अभियान के दौरान गांजे की कच्ची पत्तियां और बीजों से भरे कई बैग मिले, जिन्हें तस्करी के लिए ले जाने की तैयारी थी. किसी भी प्रकार की तस्करी को रोकने के लिए पुलिस ने बरामद किए गए सभी नशीले पदार्थों को घटनास्थल पर ही आग के हवाले कर दिया. कुछ ही समय में तस्करों की काली मेहनत राख में बदल गई.
सुरक्षा बलों की संयुक्त रणनीति
सोनामुरा थाना प्रभारी निरीक्षक तापस दास ने इस सफल अभियान का नेतृत्व किया और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि यह पूरी कार्रवाई TSR की 11वीं और 14वीं बटालियन के साथ मिलकर संयुक्त रूप से पूरी की गई है. पुलिस और अर्धसैनिक बलों के बीच सटीक तालमेल और खुफिया जानकारी की वजह से ही इतने बड़े स्तर पर नशे के काले कारोबार को रोकना संभव हो पाया. अधिकारियों का कहना है कि वे इस पूरे क्षेत्र को नशा मुक्त बनाने हेतु पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं.
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