नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कथित 'शूटिंग वीडियो' के संबंध में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि याचिकाकर्ताओं को पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट का रुख करना चाहिए.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने कहा कि हर चुनावी विवाद को सीधे सुप्रीम कोर्ट में लाना एक चिंताजनक ट्रेंड बनता जा रहा है. कोर्ट ने कहा, 'आपने गुवाहाटी हाई कोर्ट का रुख क्यों नहीं किया? उसके अधिकार क्षेत्र को कमजोर न करें.'
News Alert ! Why haven't you gone to Gauhati High Court? Don't undermine its authority: SC on pleas seeking action against Assam CM Sarma over viral video.
— Press Trust of India (@PTI_News) February 16, 2026
Will ask parties to use restraint and remain within boundaries of constitutional morality, but this is becoming a trend… pic.twitter.com/q58tlujC3E
चीफ जस्टिस ने हाई कोर्ट को बायपास करके पार्टियों के सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने के ट्रेंड पर कड़ी नाराजगी जताई. मामलों का निपटारा करते हुए, बेंच ने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से पिटीशनर्स की जल्दी सुनवाई करने की अपील की. बेंच ने आदेश में कहा, 'इन सभी मुद्दों पर अधिकार क्षेत्र वाले हाई कोर्ट द्वारा असरदार तरीके से फैसला सुनाया जा सकता है. हमें यहां इस पर विचार करने का कोई कारण नहीं दिखता और इसलिए हम याचिकाकर्ताओं को अधिकार क्षेत्र वाले हाई कोर्ट में भेजते हैं.
CJI ने कहा, 'जहां भी चुनाव आते हैं, यह कोर्ट एक राजनीतिक लड़ाई का मैदान बन जाता है.' याद होगा कि जब पिछले हफ्ते कम्युनिस्ट पार्टियों द्वारा दायर याचिकाओं का अर्जी अर्जी के लिए मेंशन किया गया था, तब भी CJI ने ऐसी ही टिप्पणी की थी. CJI सूर्यकांत ने राजनीतिक पार्टियों से आपसी सम्मान और आत्म-संयम के आधार पर चुनाव लड़ने की भी अपील की.
सुनवाई के दौरान सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मुख्यमंत्री ने बार-बार विवादित बयान दिए हैं और मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट को दखल देना चाहिए.
यह विवाद 7 फरवरी को तब बढ़ गया जब असम BJP के ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री कथित तौर पर एक खास समुदाय के लोगों पर राइफल तानते हुए दिख रहे थे. बड़े पैमाने पर विरोध और राजनीतिक विरोध के बाद यह पोस्ट हटा दी गई.
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े नेताओं ने इस मामले में अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं, जिसमें मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी SIT बनाने की मांग की गई है. CPI नेता एनी राजा ने भी नफरत फैलाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है.