अब बिना बीमा वाली गाड़ी में नहीं मिलेगा पेट्रोल? सुप्रीम कोर्ट के बड़े निर्देश से करोड़ों वाहन मालिकों में हलचल
सुप्रीम कोर्ट ने बिना वैध थर्ड-पार्टी बीमा वाले वाहनों पर सख्ती के संकेत दिए हैं. अदालत ने पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया है, जिसके तहत बीमा की पुष्टि होने के बाद ही ईंधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाई जाएगी.
देश में बिना थर्ड-पार्टी बीमा के चल रहे वाहनों की बढ़ती संख्या पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है. अदालत ने केंद्र सरकार, सड़क परिवहन मंत्रालय और बीमा नियामक को मिलकर ऐसी व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया है, जिससे बिना वैध बीमा वाले वाहनों की पहचान आसान हो सके. इसके लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने को कहा गया है, जिसमें पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से पहले वाहन के बीमा की स्थिति की जांच की जाएगी.
बिना बीमा वाले वाहनों पर सख्ती की तैयारी
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना थर्ड-पार्टी बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं. अदालत ने माना कि इससे सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिलने में कठिनाई आती है. इसी कारण अदालत ने सुझाव दिया कि पेट्रोल पंपों पर वाहन को ईंधन देने से पहले उसके बीमा की डिजिटल जांच की जाए. यदि बीमा वैध नहीं हो, तो पायलट परियोजना के तहत ऐसे वाहन को ईंधन उपलब्ध न कराया जाए. इस व्यवस्था में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक के उपयोग की भी बात कही गई है.
नई व्यवस्था और तकनीक पर रहेगा जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य है, लेकिन इसका प्रभावी पालन नहीं हो रहा. अदालत ने आईआरडीएआई को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने और राज्य पुलिस को ऐसे मोबाइल उपकरण या ऐप उपलब्ध कराने को कहा है, जिनकी मदद से मौके पर ही वाहन के बीमा की स्थिति जांची जा सके. साथ ही बिना बीमा वाले वाहनों पर डिजिटल माध्यम से ई-चालान जारी करने की व्यवस्था विकसित करने का भी सुझाव दिया गया है. अदालत ने पहले दिए गए बीमा संबंधी निर्देशों का उल्लेख करते हुए नई अवधि के अनुरूप आवश्यक कदम उठाने पर भी जोर दिया.
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टोल प्लाजा और सड़क सुरक्षा पर भी फोकस
अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाओं और टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों को कम करने के लिए भी आधुनिक तकनीक अपनाने की बात कही. निर्देश में कहा गया कि कुछ मार्गों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ऐसी प्रणाली विकसित की जाए, जिसमें वाहन को रोके बिना उसकी पहचान कर टोल शुल्क स्वतः वसूला जा सके. अदालत का मानना है कि अनिवार्य बीमा केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सड़क हादसों के पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है.