'नाबालिग को धमकाना बर्दाश्त नहीं', सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से बढ़ी स्वतंत्र भारद्वाज की मुश्किलें
सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन में शामिल 14 वर्षीय नाबालिग लड़की को डराने-धमकाने और घर पर हमला करने के आरोपों पर दिल्ली व यूपी सरकार से रिपोर्ट मांगी है.
सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में शामिल 14 वर्षीय नाबालिग लड़की और उसके परिवार को डराने-धमकाने के आरोपों पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आपराधिक कार्यवाही से रोकने के लिए किसी को भी पीड़िता या उसके परिवार को दबाने या धमकाने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
नाबालिग के वकील ने लगाए गंभीर आरोप
बता दें कि नाबालिग के वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद लड़की का उत्पीड़न किया गया और उसके घर पर पथराव किया गया. वकील ने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी प्रभावशाली व्यक्ति स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने पर पीड़िता पर ही केस दर्ज कर दिया गया, जबकि वीडियो में आरोपी के साथ दिखे अन्य लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई.
किसी भी दोषी को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए: सीजेआई
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की गंभीरता को रेखांकित किया. पीठ ने कहा, 'यदि किसी बच्चे के खिलाफ हिंसा करने वाले असामाजिक तत्व खुले घूम रहे हैं और पीड़ित परिवार को धमकाने की कोशिश कर रहे हैं, तो यह एक अत्यंत गंभीर मामला है. ऐसे मामलों को हलके में नहीं लिया जा सकता और किसी भी दोषी को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए.'
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स्वतंत्र पर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
बता दें कि दिल्ली पुलिस ने 5 सितंबर को आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज एफआईआर में एससी/एसटी एक्ट और आपराधिक धमकी देने की धाराएं जोड़ी हैं. भारद्वाज ने एक इंटरव्यू में कबूल किया था कि उसने प्रदर्शन के दौरान लड़की के पिता पर हमला किया था. सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को नाबालिग की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए दिल्ली और उत्तर प्रदेश सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है.