दिल्ली प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, गृह मंत्रालय के अधिकारियों को मिला नोटिस

दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर के आदेश के कथित उल्लंघन को लेकर गृह मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

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Km Jaya

दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई की. अदालत ने 9 अक्टूबर के आदेश के कथित उल्लंघन को लेकर गृह मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया और हलफनामा दाखिल कर जवाब देने को कहा. कोर्ट ने पूछा कि अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए. मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी.

सुनवाई के दौरान वकीलों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया और कुछ के साथ मारपीट भी की. वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने दावा किया कि करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिया गया. उन्होंने हिरासत में लिए गए लोगों की आधिकारिक संख्या सार्वजनिक करने की मांग की. हालांकि, यह आंकड़ा सुनवाई के दौरान किया गया दावा है.

वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने क्या कहा?

वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने अपनी महिला जूनियर वकील को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाया. उन्होंने दावा किया कि उनकी जूनियर को सुप्रीम कोर्ट आते समय जबरन बस में बैठाकर करीब 12 किलोमीटर दूर ले जाया गया. वकीलों ने प्रदर्शनकारियों के फोन जब्त किए जाने का मुद्दा भी उठाया. कोर्ट ने इस मामले में आवेदन दाखिल करने को कहा और फोन जब्ती के मुद्दे पर मंगलवार को सुनवाई करने की बात कही.


मेट्रो सेवाओं और इंटरनेट पर कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रखने तथा इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं करने पर जोर दिया. अदालत ने अधिकारियों से मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के फैसले की समीक्षा करने और लोगों की आवाजाही सुचारु बनाए रखने को कहा.

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि दिल्ली मेट्रो के 303 स्टेशनों में से 45 पर प्रवेश और निकास सीमित किए गए थे. उन्होंने कहा कि मेट्रो की सामान्य समय-सारणी के अनुसार सेवाएं चलीं और कुल 7,981 ट्रेन ट्रिप संचालित हुईं. जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने DMRC से प्रभावित स्टेशनों का नक्शा भी मांगा.

धारा 163 का बोर्ड हटाने का निर्देश

सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के बाहर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू होने की सूचना वाले बोर्ड का मुद्दा भी उठा. वकीलों ने आरोप लगाया कि इसके कारण अदालत में प्रवेश करने में परेशानी हुई. इस पर कोर्ट ने बोर्ड तुरंत हटाने का निर्देश दिया.

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया. वहीं, केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन नहीं किया गया था. अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार कानून के दायरे में होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने बैरिकेडिंग की समीक्षा करने, यातायात संबंधी नई एडवाइजरी जारी करने और संबंधित अधिकारियों से जवाब दाखिल करने को कहा. अब मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी.