मालदा घटना पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, NIA को सौंपी जांच; मुख्य सचिव को जमकर लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए जांच एनआईए (NIA) को सौंप दी है. अदालत ने बंगाल पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए और मुख्य सचिव को फोन न उठाने पर कड़ी फटकार लगाई.
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों को घंटों बंधक बनाए जाने की शर्मनाक घटना पर देश की शीर्ष अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है. मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपिन पंचोली की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपने का आदेश दिया है. अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य पुलिस के खिलाफ आरोप अत्यंत गंभीर हैं, इसलिए एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय एजेंसी का हस्तक्षेप अनिवार्य हो गया है.
सुनवाई के दौरान कोर्ट का सबसे तीखा प्रहार पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव पर रहा. दरअसल, जब मालदा में जजों को भीड़ ने घेरा था, तब कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने मुख्य सचिव को फोन किया था, जिसका उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. कोर्ट ने इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए इसे 'प्रशासन की पूरी तरह नाकामी' करार दिया. अधिकारी द्वारा 'फ्लाइट में होने' की दलील को कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया और उन्हें बिना किसी बहानेबाजी के माफी मांगने का निर्देश दिया. शीर्ष अदालत ने चिंता व्यक्त की कि सचिवालय और सरकारी दफ्तरों में बढ़ता राजनीतिक दखल नौकरशाही की साख को खत्म कर रहा है.
मालदा की घटना: 'पूर्व नियोजित साजिश'
यह पूरा विवाद 1 अप्रैल की उस घटना से जुड़ा है, जब मालदा में मतदाता सूची के विशेष सारांश संशोधन (SIR) के काम में लगे सात न्यायिक अधिकारियों को उग्र भीड़ ने घंटों बंधक बनाए रखा. इन अधिकारियों में तीन महिला जज भी शामिल थीं. भीड़ का आरोप था कि मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे 'पूर्व नियोजित और उकसावे का परिणाम' बताया. इससे पहले कोर्ट ने जजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र बलों की तैनाती का भी आदेश दिया था.
NIA को जांच की खुली छूट
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब राज्य पुलिस द्वारा दर्ज सभी FIR एनआईए के अधीन होंगी. एजेंसी को गिरफ्तार किए गए 26 लोगों से पूछताछ करने और जरूरत पड़ने पर नई FIR दर्ज करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है. अदालत ने एनआईए को समय-समय पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिससे यह साफ संदेश गया है कि न्यायपालिका अपनी स्वतंत्रता और गरिमा पर होने वाले किसी भी हमले को हल्के में नहीं लेगी.