बजट से पहले महाराष्ट्र में बड़ा खेला! जल्दबाजी में अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को बनाया जा रहा है नया डिप्टी CM
महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल देखने को मिल रही है. NCP के भीतर उथल पुथल और संभावित विलय की चर्चाओं के बीच सुनेत्रा पवार को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने पर जल्द फैसला हो सकता है. इसे सत्ता संतुलन और संगठन पर पकड़ बनाए रखने की रणनीति माना जा रहा है.
महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर में पहुंच गई है. NCP के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही खबरों के बीच सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाए जाने की संभावना ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है. अजीत पवार के निधन के कुछ ही दिनों बाद यह कदम उठाने की तैयारी को महज संवेदनात्मक फैसला नहीं बल्कि पूरी तरह राजनीतिक रणनीति माना जा रहा है. पार्टी नेतृत्व चाहता है कि किसी भी तरह से संगठन पर पकड़ कमजोर न हो और NCP SP को आगे बढ़ने का मौका न मिले.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अजीत पवार की गैर मौजूदगी से पैदा हुए खालीपन को तुरंत भरना NCP और उसके सहयोगियों के लिए जरूरी हो गया है. अगर यह पद लंबे समय तक खाली रहता है तो विधायकों में असमंजस बढ़ सकता है और शरद पवार गुट को नैतिक बढ़त मिल सकती है. यही वजह है कि वरिष्ठ नेताओं ने सुनेत्रा पवार के नाम पर सहमति बनाकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को जानकारी दी, जिसके बाद मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ी.
क्यों सुनेत्रा पवार को नया डिप्टी सीएम बनाना चाहती है पार्टी?
बीते कुछ समय से दो NCP गुटों के विलय को लेकर बातचीत चल रही है. स्थानीय निकाय चुनावों में साथ आने के बाद इस चर्चा ने और जोर पकड़ा है. अजीत पवार के निधन के बाद कुछ नेताओं ने खुलकर शरद पवार के नेतृत्व में एकजुट होने की वकालत भी की. लेकिन पार्टी के हर नेता इस विचार से सहज नहीं है. कई लोगों को आशंका है कि अगर विलय हुआ तो नियंत्रण शरद पवार खेमे के हाथ में चला जाएगा और मौजूदा सत्ता समीकरण बदल सकता है.
बजट को लेकर BJP की रणनीति
इस पूरे घटनाक्रम में BJP की भूमिका भी बेहद अहम मानी जा रही है. राज्य का बजट सत्र नजदीक है और पार्टी किसी भी तरह का राजनीतिक टकराव नहीं चाहती. यही वजह है कि स्थिरता बनाए रखने के लिए डिप्टी सीएम पद को जल्द भरने पर जोर दिया जा रहा है. माना जा रहा है कि वित्त विभाग फिलहाल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास ही रहेगा और वही इस साल का बजट पेश करेंगे. इससे सरकार के कामकाज में निरंतरता बनी रहेगी.
अगर सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाया जाता है तो उनके सामने कई चुनौतियां होंगी. शपथ लेने के बाद उन्हें छह महीने के भीतर विधानसभा का सदस्य बनना होगा. इसके अलावा पार्टी विधायकों को एकजुट रखना और संगठन में भरोसा कायम करना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी. शुरुआत में उनके पास कोई मंत्रालय न होना भी संकेत देता है कि यह नियुक्ति फिलहाल राजनीतिक संतुलन साधने के लिए की जा रही है.