चीनी के दाम में लगी आग, त्योहारों से पहले सरकार की बढ़ी चिंता; आयात शुल्क हटाने पर विचार

भारत में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बीच सरकार आयात शुल्क घटाने पर विचार कर रही है. गन्ने का एथेनॉल उत्पादन में बढ़ता इस्तेमाल, कम रिकवरी और त्योहारों की मांग चिंता बढ़ा रही है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: देश में गन्ने की खेती बढ़ने के बावजूद चीनी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है. महाराष्ट्र के कोल्हापुर में थोक भाव अगस्त की शुरुआत से करीब 20 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं. खुदरा बाजार में भी कई राज्यों में कीमतें 60 रुपये किलो के आसपास पहुंच गई हैं. गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली से पहले बढ़ती मांग ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. अब घरेलू आपूर्ति सुधारने के लिए चीनी आयात का विकल्प सामने है.

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे गन्ने का एक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन की ओर जाना अहम वजह माना जा रहा है. भारत E20 लक्ष्य की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है, जिसके लिए बड़ी संख्या में डिस्टिलरी स्थापित की गई हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, गन्ने की बढ़ती हिस्सेदारी एथेनॉल में जाने से चीनी उत्पादन प्रभावित हुआ है. उत्तर प्रदेश में फसल रोग के कारण गन्ने की उत्पादकता और चीनी रिकवरी में भी कमी आई है.

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची चीनी की कीमत

महाराष्ट्र के प्रमुख चीनी कारोबार केंद्र कोल्हापुर में थोक भाव अगस्त की शुरुआत से लगभग 20 प्रतिशत बढ़कर 5,350 रुपये प्रति 100 किलो हो गए हैं. 18 अगस्त को देश में चीनी का औसत खुदरा भाव करीब 52.3 रुपये किलो रहा. पंजाब में कीमत करीब 65 रुपये किलो तक पहुंच गई है. मुंबई, भोपाल समेत कुछ बाजारों में भी भाव 58 से 63 रुपये किलो के बीच बताए जा रहे हैं.


आयात शुल्क घटाने पर सरकार की नजर

घरेलू बाजार में लगातार बढ़ते दाम के बीच सरकार अब चीनी आयात को आसान बनाने की तैयारी में है. रिपोर्टों के मुताबिक, चीनी पर लागू 100 प्रतिशत आयात शुल्क हटाने पर विचार किया जा रहा है. इससे करीब एक दशक बाद भारत में बड़े पैमाने पर विदेशी चीनी आने का रास्ता खुल सकता है. सरकार पहले ही घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के लिए 13 मई से 30 सितंबर तक चीनी निर्यात पर रोक लगा चुकी है.

त्योहारों से पहले बढ़ी सरकार की चिंता

गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली के दौरान मिठाइयों तथा खाद्य उत्पादों में चीनी की मांग बढ़ती है. ऐसे समय में महंगी चीनी का असर सीधे आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ सकता है. सरकार आयात के अलावा थोक कारोबारियों के स्टॉक की सीमा तय करने और जमाखोरी पर रोक लगाने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन और खाद्य जरूरतों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है.

E20 नीति पर भी उठ रहे सवाल

चीनी संकट ने E20 कार्यक्रम के तहत गन्ने के एथेनॉल इस्तेमाल को लेकर बहस तेज कर दी है. मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भी खाद्य और ईंधन के बीच संतुलन पर जोर दिया है. उनका सुझाव है कि भारत को E20 से आगे बढ़ने से पहले इसकी पूरी आर्थिक और खाद्य लागत का आकलन करना चाहिए. इस बीच चीनी की महंगाई पर राजनीतिक सवाल भी उठ रहे हैं और 22-23 अगस्त को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की गई है.