वंदे मातरम् को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस कार्यसमिति ने अपना पुराना रुख दोहराया है. बुधवार को हुई CWC बैठक में तय किया गया कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे. पार्टी ने इसे 1937 में लिए गए ऐतिहासिक फैसले से जोड़ते हुए अपने निर्णय को स्पष्ट बताया है.
चार घंटे से अधिक चली बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर कोई भ्रम नहीं है. उन्होंने बताया कि 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे प्रमुख नेताओं के विचारों के आधार पर जो फैसला हुआ था, कांग्रेस उसी का पालन करेगी.
#WATCH | Delhi: On Vande Mataram row, Congress General Secretary (Organisation) KC Venugopal says, "There is no confusion about that... Today, we discussed this during the CWC... Our stand is very clear. In 1937, Mahatma Gandhi, Pandit Jawaharlal Nehru, and Sardar Vallabhbhai… pic.twitter.com/bu1E2Ee7e8
— ANI (@ANI) August 19, 2026
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के मुताबिक, 28 अक्टूबर 1937 को CWC ने वंदे मातरम् को लेकर प्रस्ताव पारित किया था. इसमें सार्वजनिक और राष्ट्रीय आयोजनों के लिए पहले दो अंतरों को उपयुक्त माना गया था. उनका कहना है कि इन हिस्सों में मातृभूमि की व्यापक प्रशंसा है, जबकि आगे के हिस्सों में धार्मिक और पौराणिक संदर्भ आते हैं.
विवाद उस समय और बढ़ गया जब स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के गायन का वीडियो सामने आया. BJP नेताओं ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने गीत को रोकने का इशारा किया था. इस मामले में दिल्ली और कर्नाटक में उनके खिलाफ शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं. कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश बताया है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और BJP सांसद मनोज तिवारी समेत कई नेताओं ने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए. शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व वंदे मातरम् के पूर्ण गायन को लेकर असहज है. दूसरी ओर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दो अंतरों वाले संस्करण का बचाव करते हुए कहा कि यही परंपरा दशकों से चली आ रही है.
विवाद के बीच केंद्र सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों के लिए वंदे मातरम् का नया प्रोटोकॉल जारी किया है. निर्धारित सरकारी समारोहों में छह अंतरों वाले संस्करण का गायन या वादन किया जाएगा, जिसकी अवधि करीब 3 मिनट 10 सेकंड होगी. जब वंदे मातरम् और राष्ट्रगान दोनों प्रस्तुत किए जाएंगे, तो पहले वंदे मातरम् होगा. हालांकि, कांग्रेस ने अपने पार्टी कार्यक्रमों के लिए दो अंतरों वाला 1937 का फैसला कायम रखा है.