शेयर बाजार की रॉकेट की रफ्तार... SEBI और SAT को CJI DY चंद्रचूड़ ने क्यों दी सतर्क रहने की सलाह?
Stock Market Surging: शेयर बाजार की रॉकेट वाली रफ्तार पर प्रतिक्रिया देते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ ने SEBI और SAT को सतर्क रहने की सलाह दी है. उन्होंने SAT से नई बेंच खोलने पर भी विचार करने की अपील की. कहा कि अधिक लेन-देन और नए-नए नियमों के कारण काम का बोझ बढ़ गया है. दरअसल, डीवाई चंद्रचूड़ सैट के नए कैंपस का उद्घाटन करने पहुंचे थे.
Stock Market Surging: भारत के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा है कि शेयर बाजार में जितनी अधिक तेजी होगी, SEBI और SAT की भूमिका उतनी ही ज्यादा होगी. उन्होंने शेयर बाजार की बढ़ती रफ्तार और एतिहासिक 80 हजार के आंकड़े को छूने के बाद ये प्रतिक्रिया दी. डीवाई चंद्रचूड़ ने गुरुवार को SAT के नए कैंपस का उद्घाटन किया और कहा कि शेयर बाजार में उछाल के कारण SEBI और SAT की जिम्मेदारियां बढ़ गईं हैं.
CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आप सक्सेस को सेलिब्रेट भी करेंगे, लेकिन साथ ही सतर्कता भी बनाए रखेंगे. उन्होंने कहा कि इस फील्ड में समय पर कार्रवाई और गलतियों को सुधारना बेहद जरूरी है. उन्होंने सैट के और अधिक बेंच की वकालत करते हुए कहा कि इसकी नींव स्थिर रहे, इसलिए जरूरी है कि औऱ पीठों को खोला जाए.
आखिर डीवाई चंद्रचूड़ ने क्यों जताई चिंता?
उन्होंने कहा कि बढ़ते बाजार के बीच जश्न का माहौल भी चलता है, लिहाजा इस दौरान संतुलन के साथ धैर्य भी बनाए रखने की जरूरत है. इसके लिए सेबी और सैट को बराबर नजर रखनी होगी. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि इन्वेस्टर्स को ये जानकारी होनी चाहिए कि इन्वेट कानून की ओर से संरक्षित है और किसी तरह के विवाद के लिए देश में मजबूत तंत्र है. उन्होंने सैट को एक रेफरी की भूमिका के तौर पर बताया और कहा कि रेफरी की तरह सैट भी ये सुनिश्चित करता है कि सभी पक्ष, सभी तरह के नियमों का पालन करें.
डीवाई चंद्रचूड़ ने सैट के विस्तार के लिए खाली पड़े पदों को भरने पर जोर दिया. इस दौरान डीवाई चंद्रचूड़ ने सैट में एक वकील के रूप में अपने शुरुआती दिनों के कामकाज की भी चर्चा की. आखिर में उन्होंने सैट के विस्तार के अपने बयान पर कहा कि ये उनका निजी मामला है, लेकिन इस पर विचार किया जाना चाहिए.
इस मौके पर सैट के पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) जस्टिस पी. एस. दिनेश कुमार ने कहा कि सैट में फिलहाल 1 हजार 028 अपीलें ऐसी हैं, जो लंबित हैं. उन्होंने कहा कि सैट की स्थापना 1997 में हुई थी, तब से लेकर अब तक सैट ने करीब 6700 से ज्यादा मामलों का निपटारा किया है.
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